
घर के आंगन में करें मुर्गियों की उन्नत नस्लों का पालन, कम लागत में पाएं बड़ा मुनाफा
सर्दियों के मौसम में अंडों और चिकन की बाजार में मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे में मुर्गी पालन (पोल्ट्री फार्मिंग) एक कम लागत वाला, लेकिन अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय साबित हो सकता है। इसकी खास बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी जगह की आवश्यकता नहीं होती—आप अपने घर के आंगन में भी मुर्गियों का पालन शुरू कर सकते हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत इस व्यवसाय को सब्सिडी और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं, जिससे इसकी शुरुआत करना और भी आसान हो जाता है।
कौन-सी नस्लें हैं अधिक फायदेमंद?
मुर्गी पालन के लिए दो प्रकार की नस्लें प्रमुख रूप से उपयोग में लाई जाती हैं:
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स्थानीय (देसी) नस्लें
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उन्नत (संकर) नस्लें
उन्नत नस्लें देसी नस्लों की तुलना में 2-3 गुना अधिक उत्पादन देती हैं, जिससे अंडे और मांस दोनों की मात्रा ज्यादा मिलती है। हालांकि, यदि आपके इलाके में देसी मुर्गियों की मांग ज्यादा है, तो उनके पालन से भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।
मुर्गी पालन के लिए प्रमुख उन्नत नस्लें
देश के प्रमुख अनुसंधान संस्थानों जैसे कि कुक्कुट अनुसंधान निदेशालय (DPR), हैदराबाद और केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (CARI), बरेली ने मुर्गियों की कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं:
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वनराजा, ग्रामप्रिया, श्रीनिधि, कृषिब्रो, जनप्रिया, वनश्री, नर्मदानिधि, हिमसमृद्धि, कामरूप, झारसीम, प्रतापधान, अतुल्य
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CARI निर्भीक, हितकारी, उपकारी, सोनाली, प्रिया
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KARI श्यामा, KARI देबेंद्र, कैरिब्रो विशाल, कैरिब्रो धनराज, कैरिब्रो ट्रॉपिकाना
इसके अलावा, ICAR-CARI द्वारा विकसित नस्लों में शामिल हैं:
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कलिंग ब्राउन, कावेरी, ऐसिल क्रॉस, चाब्रो-CePiOD
जबकि पशु विज्ञान विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित कुछ प्रमुख नस्लें हैं:
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गिरिराज, स्वर्णधारा, नंदनम, राजश्री
मुर्गी खरीदते समय क्या रखें ध्यान?
मुर्गी पालन शुरू करने के लिए 4 से 6 सप्ताह की उम्र वाली मुर्गियां खरीदना सबसे फायदेमंद होता है। ये मुर्गियां जल्दी अनुकूल हो जाती हैं, इनकी देखभाल आसान होती है और मृत्यु दर भी कम होती है। एक दिन के चूजों की तुलना में ये ज्यादा सुरक्षित विकल्प हैं।
देसी नस्लें और उनके पालन क्षेत्र
भारत के विभिन्न राज्यों में देसी नस्लों की मुर्गियों का पालन प्रचलित है, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। कुछ प्रमुख नस्लें और उनके क्षेत्र:
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कड़कनाथ – मध्यप्रदेश
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असील – छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश
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बुसरा – गुजरात, महाराष्ट्र
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डंकी – आंध्र प्रदेश
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दाओथिगीर, मीरी – असम
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घेगस – कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
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हेरिगहाटा ब्लैक – पश्चिम बंगाल
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कश्मीर फेवरोला – जम्मू-कश्मीर
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निकोबारी – अंडमान-निकोबार
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तेलीचेरी – केरल
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मेवाड़ी – राजस्थान
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पंजाब ब्राउन – पंजाब, हरियाणा
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हंसली – उत्तराखंड, ओडिशा
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कौनयेन – मणिपुर
कहां से लें प्रशिक्षण और चूजे?
मुर्गी पालन से जुड़े प्रशिक्षण और उन्नत नस्लों के चूजे प्राप्त करने के लिए आप संपर्क कर सकते हैं:
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कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)
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पशु चिकित्सा महाविद्यालय
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राज्य पशुपालन विभाग
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केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन (CPDO)
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DPR, हैदराबाद
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CARI, बरेली
यह संस्थान चूजों के साथ-साथ पोल्ट्री प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराते हैं।
सरकार से सब्सिडी और लोन की सुविधा
सरकार द्वारा पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग राज्यों में सब्सिडी और लोन की सुविधा दी जाती है। किसान पशुपालन विभाग या बैंक के माध्यम से इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। सब्सिडी और लोन की विस्तृत जानकारी के लिए अपने जिले के पशुपालन विभाग से संपर्क करें।
मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे कम पूंजी, कम जगह और थोड़े समय में शुरू किया जा सकता है। घर के आंगन से शुरुआत कर, उन्नत या देसी नस्लों का चयन कर, और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान अच्छी आमदनी कर सकते हैं। सर्दियों के मौसम में इसकी मांग और लाभ दोनों बढ़ जाते हैं—अब समय है इस मौके का भरपूर फायदा उठाने का।



