खेत खलिहान

सरसों की इन उन्नत किस्मों से बढ़ेगी पैदावार

रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसानों के लिए उन्नत किस्मों का चयन काफी महत्वपूर्ण होता है। सही किस्म का चुनाव क्षेत्र की जलवायु, सिंचाई सुविधा और बुवाई के समय के आधार पर किया जाए तो किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर की ओर से विकसित BPM (Q) 172 (DRMRCI 172) और DRMR 2017-15 राधिका ऐसी किस्में हैं, जिन्हें अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के लिए विकसित किया गया है। BPM (Q) 172 की औसत उपज करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है, जबकि राधिका किस्म देर से बुवाई और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

वीपीएम (Q) 172 से 23 क्विंटल तक उपज
BPM (Q) 172 यानी DRMRCI 172 सरसों की नई उन्नत किस्म है, जिसे वर्ष 2025 में आधिकारिक रूप से जारी किया गया। यह किस्म देश के जोन-3 के तहत आने वाले राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के जलवायु एवं सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताई गई है। इस किस्म की औसत बीज उपज 2304 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, यानी करीब 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके बीज में तेल की मात्रा करीब 41.8 प्रतिशत तक पाई जाती है। फसल लगभग 131 दिन में पककर तैयार हो जाती है। BPM (Q) 172 के पौधों की औसत ऊंचाई करीब 191 सेंटीमीटर बताई गई है। इसके अलावा यह किस्म सफेद रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी बताई गई है और इसमें माहू यानी चेपा का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम पाया जाता है।

राधिका किस्म देर से बुवाई में भी उपयोगी
यदि किसी कारण से किसान सरसों की बुवाई समय पर नहीं कर पाते हैं और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, तो DRMR 2017-15 राधिका किस्म पर विचार किया जा सकता है। इस किस्म को भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, भरतपुर ने विकसित किया है और इसे वर्ष 2021 में अधिसूचित किया गया था। राधिका किस्म को मुख्य रूप से देर से बुवाई और सिंचित अवस्था के लिए उपयुक्त बताया गया है। इसे देश के जोन-2 क्षेत्र के लिए जारी किया गया है, जिसमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान के कुछ क्षेत्र शामिल हैं।

राधिका से 17.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उपज
राधिका सरसों की औसत बीज उपज करीब 1788 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, यानी 17.88 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके बीज में तेल की मात्रा करीब 40.7 प्रतिशत तक होती है। इस किस्म की फसल को पकने में लगभग 120 से 150 दिन लग सकते हैं। इसके पौधों की ऊंचाई करीब 191 से 204 सेंटीमीटर तक बताई गई है। उचित समय पर सिंचाई, पोषक तत्व प्रबंधन और नियमित फसल निगरानी से किसान इस किस्म की उत्पादन क्षमता का बेहतर लाभ ले सकते हैं।

कई रोगों और कीटों का कम प्रकोप
राधिका किस्म में सरसों की फसल को प्रभावित करने वाले कुछ प्रमुख रोगों और कीटों का प्रकोप कम पाया गया है। इनमें अल्टरनेरिया पत्ती झुलसा, सफेद रतुआ, तना सड़न, डाउनी मिल्ड्यू, पाउडरी मिल्ड्यू और माहू शामिल हैं। हालांकि, किसी भी किस्म की खेती में नियमित रूप से खेत की निगरानी करना जरूरी है। रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार नियंत्रण उपाय अपनाने चाहिए।

किसानों को कहां मिलेगा इन किस्मों का बीज
जो किसान BPM (Q) 172 की बुवाई करना चाहते हैं, वे इसके प्रामाणिक बीज के लिए भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईआरएमआर/डीआरएमआर), सेवर, भरतपुर से संपर्क कर सकते हैं। वहीं राधिका किस्म के प्रमाणित बीज के लिए किसान भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान, सेवर, भरतपुर के अलावा नजदीकी बीज निगम केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। बीज खरीदने से पहले उसकी उपलब्धता और प्रमाणिकता की जानकारी जरूर प्राप्त करनी चाहिए। किसानों को किस्म का चयन करते समय अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा और बुवाई के समय को ध्यान में रखना चाहिए। किसी भी किस्म की संभावित उपज कृषि परिस्थितियों और फसल प्रबंधन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

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