
हल्दी की खेती के लिए छत्तीसगढ़ के किसानों को मिलेगी सब्सिडी
छत्तीसगढ़ में हल्दी की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। राज्य सरकार मसाला फसलों का रकबा बढ़ाने और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना चला रही है। इस योजना के तहत वर्ष 2026-27 में हल्दी की खेती का क्षेत्र बढ़ाने के लिए 1300 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए सरकार ने 620 लाख रुपए यानी 6.20 करोड़ रुपए का बजट रखा है। योजना के तहत पात्र किसानों को हल्दी की खेती के लिए मिलने वाला अनुदान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से उनके बैंक खाते में दिया जा रहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के नेतृत्व में संचालित इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना और किसानों के लिए खेती से अतिरिक्त आय के अवसर तैयार करना है।
हल्दी की खेती के लिए 1300 हेक्टेयर का लक्ष्य
वर्ष 2026-27 में राज्य पोषित मद के अंतर्गत मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना संचालित की जा रही है। उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी विभाग ने योजना के तहत हल्दी फसल के क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य 1300 हेक्टेयर निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार ने कुल 620 लाख रुपए का बजट प्रावधान किया है। सरकार का मानना है कि मसाला फसलों की खेती को बढ़ावा देने से किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती का अवसर मिलेगा। इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
किसानों को DBT के जरिए मिलेगा अनुदान
हल्दी बीज की आपूर्ति को लेकर सामने आ रही जानकारियों पर उद्यानिकी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार, हल्दी बीज की आपूर्ति संचालनालय या जिला स्तर से नहीं की जाती है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र किसानों को योजना का अनुदान DBT के माध्यम से दिया जाता है। इसके लिए किसानों द्वारा खरीदे गए हल्दी बीज के बिल और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसके बाद खेत में फसल का भौतिक सत्यापन किया जाता है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने और किसान के पात्र पाए जाने पर अनुदान भुगतान की कार्रवाई की जाती है।
अब तक किसानों को मिले 138 लाख रुपए
मसाला क्षेत्र विस्तार प्रोत्साहन योजना का लाभ किसानों तक पहुंचना शुरू हो चुका है। विभाग के अनुसार, अब तक योजना के तहत 138 लाख रुपए यानी 1.38 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों के बैंक खातों में किया जा चुका है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना के तहत जिन हल्दी बीजों पर अनुदान दिया जा रहा है, वे स्वस्थ और उच्च क्वालिटी वाले हैं। इनके अंकुरण को लेकर किसी प्रकार की समस्या नहीं है। पात्र किसानों को जरूरी दस्तावेजों की जांच और फसल के भौतिक सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुदान का भुगतान किया जा रहा है।
हल्दी की खेती से किसानों को क्या फायदा होगा
छत्तीसगढ़ में हल्दी सहित अन्य मसाला फसलों का क्षेत्र बढ़ने से किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा एक अतिरिक्त व्यावसायिक विकल्प मिल सकता है। मसाला फसलों की बाजार मांग को देखते हुए किसान अपनी खेती में विविधता ला सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मसालों का उत्पादन बढ़ने के साथ प्रसंस्करण और मसाला आधारित उद्योगों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता भी बढ़ सकती है। सरकार का लक्ष्य इस योजना के माध्यम से फसल विविधीकरण, किसानों की अतिरिक्त आय और मसाला आधारित कृषि गतिविधियों को एक साथ बढ़ावा देना है। छत्तीसगढ़ में किसान साग-सब्जियों और फलों के साथ मसाला फसलों की खेती में भी रुचि दिखा रहे हैं। ऐसे में हल्दी का क्षेत्र विस्तार बाजार आधारित खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
किसानों के लिए जरूरी बात
हल्दी की खेती पर योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि सरकार की ओर से सीधे हल्दी बीज की आपूर्ति नहीं की जा रही है। किसान द्वारा खरीदे गए पात्र बीज के बिल और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना जरूरी है। इन दस्तावेजों की जांच और खेत में फसल के भौतिक सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अनुदान DBT के जरिए बैंक खाते में दिया जाएगा। इसलिए किसान हल्दी बीज खरीदते समय संबंधित बिल और अन्य जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें, ताकि सत्यापन और अनुदान भुगतान की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो।



