
सर्दियों में अपने दुधारू पशुओं को खिलाएं यह खास खुराक, बढ़ जाएगी दूध की मात्रा
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही दुधारू पशुओं जैसे गाय, भैंस की सेहत को लेकर कई तरह की समस्याएं सामने आने लगती हैं। ठंड बढ़ते ही पशुओं की भूख कम हो जाती है, जुगाली घट जाती है और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर पशुओं के दूध उत्पादन पर पड़ता है। कई बार सही देखभाल और संतुलित आहार न मिलने के कारण दूध की मात्रा में भारी गिरावट देखने को मिलती है।
ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि सर्दियों के मौसम में पशुओं की खुराक को विशेष तरीके से मैनेज किया जाए, ताकि उनका शरीर गर्म भी रहे, पेट भी भरा रहे और दूध उत्पादन भी बना रहे। पशुओं की सर्दियों की डाइट में हरा चारा, सूखा चारा, दाना, मिनरल्स और पर्याप्त पानी का संतुलन बेहद जरूरी होता है।
सर्दियों में खुराक में छोटे बदलाव से बड़ा फायदा
गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी, लुधियाना के पशुधन उत्पादन प्रबंधन विभाग के एचओडी डॉ. यशपाल सिंह का कहना है कि अगर सर्दियों की शुरुआत में ही पशुओं की खुराक में कुछ छोटे लेकिन जरूरी बदलाव कर लिए जाएं, तो न केवल पशु बीमारियों से बचे रहते हैं, बल्कि उनका दूध उत्पादन भी कम नहीं होता। डॉ. यशपाल के अनुसार खुराक प्रबंधन के साथ-साथ पशुओं की साफ-सफाई, मालिश और ठंड से बचाव पर ध्यान दिया जाए, तो कड़ाके की ठंड में भी पशु तनाव में नहीं आते और उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।
सर्दियों में कैसी होनी चाहिए पशुओं की खुराक
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में पशुओं को पौष्टिक और संतुलित आहार देना बेहद जरूरी है। इस मौसम में बरसीम सबसे आसानी से उपलब्ध होने वाला हरा चारा है, जिसमें प्रोटीन और पानी की मात्रा अधिक होती है। बरसीम दुधारू और बढ़ते पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। बरसीम खिलाने से न सिर्फ दूध उत्पादन बना रहता है, बल्कि पशुओं की प्रोडक्शन लागत भी कम हो जाती है। जब पशु पर्याप्त मात्रा में हरा चारा खाते हैं, तो कंसंट्रेट फीड में प्रोटीन वाले महंगे इंग्रीडिएंट्स की जरूरत भी कम हो जाती है। इससे सरसों, कपास बीज, मूंगफली की खल और सोयाबीन फ्लेक्स जैसे दानों की लागत घटाई जा सकती है। अगर किसी कारण से हरे चारे की कमी हो, तो पशुओं को हरे चारे के साथ गेहूं का भूसा मिलाकर खिलाना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक 25 से 30 किलो दलहनी चारे में 5 से 10 किलो गेहूं का भूसा मिलाकर देना एक बेहतर विकल्प है।
दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए जरूरी संतुलन
सर्दियों में पशुओं के शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए उन्हें प्रतिदिन लगभग 3 किलो कंसंट्रेट मिक्सचर खिलाया जा सकता है। अगर चारे की कोई कमी न हो, तो गाय और भैंस में 10 लीटर तक दूध उत्पादन आसानी से बनाए रखा जा सकता है। दूध उत्पादन बनाए रखने के लिए पशुओं को रोजाना 40 से 50 किलो अच्छी गुणवत्ता वाला हरा चारा देना पर्याप्त माना जाता है। हालांकि इस दौरान सावधानी भी जरूरी है। सर्दियों में नाइट्रेट टॉक्सिसिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं से बचने के लिए दलहनी चारे को हमेशा गैर-दलहनी चारे या गेहूं के भूसे के साथ मिलाकर ही खिलाना चाहिए। इसके अलावा कंसंट्रेट फीड में करीब 2 प्रतिशत मिनरल मिक्सचर और 1 प्रतिशत नमक मिलाना जरूरी है। यह पशुओं की हड्डियों, मांसपेशियों और दूध उत्पादन के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
सर्दियों के लिए पशुओं के संतुलित आहार का चार्ट
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में पशुओं के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। नीचे दिए गए आहार चार्ट को अपनाकर किसान दूध उत्पादन को बनाए रख सकते हैं।
| आहार का प्रकार | मात्रा (प्रतिदिन) | लाभ |
| हरा चारा (बरसीम/अन्य) | 40–50 किलो | दूध उत्पादन बनाए रखने में मदद, प्रोटीन की पूर्ति |
| दलहनी चारा | 25–30 किलो | ऊर्जा और पोषण प्रदान करता है |
| गेहूं का भूसा | 5–10 किलो | पाचन सुधारता है, पेट फूलने से बचाव |
| कंसंट्रेट मिक्सचर | लगभग 3 किलो | शरीर का तापमान बनाए रखता है, दूध बढ़ाने में सहायक |
| मिनरल मिक्सचर | कंसंट्रेट का 2% | हड्डियां मजबूत, प्रजनन क्षमता बेहतर |
| नमक | कंसंट्रेट का 1% | मिनरल बैलेंस बनाए रखता है |
| पानी | आवश्यकता अनुसार (गुनगुना) | पाचन बेहतर, ठंड से बचाव |
इस आहार चार्ट को अपनाने से पशुओं में ठंड के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव होता है और दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है।
पानी और देखभाल भी है उतनी ही जरूरी
सर्दियों में पशुओं को साफ, ताजा और गुनगुना पानी देना चाहिए। ठंडा पानी पीने से पशुओं में पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। पशुओं की देखभाल को लेकर डॉ. यशपाल सिंह का कहना है कि सर्दियों में जानवरों को रोजाना साफ कपड़े या ब्रश से साफ करना चाहिए। इस मौसम में पशुओं के बाल नहीं काटने चाहिए और उन्हें ठंडे पानी से नहलाने से बचना चाहिए। नियमित मालिश से पशुओं का रक्त संचार बेहतर होता है और वे ठंड में भी स्वस्थ रहते हैं। कुल मिलाकर सही खुराक प्रबंधन, साफ-सफाई और देखभाल के जरिए सर्दियों में दुधारू पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन को अच्छी मात्रा में बनाए रखा जा सकता है।



