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अब दुग्ध उत्पादन से होगी डबल कमाई! जानिए केंद्र सरकार की 8 योजनाओं का कैसे लें लाभ

दूध उत्पादकों और पशुपालकों के लिए बड़ी राहत: केंद्र सरकार की 8 प्रमुख योजनाएं सक्रिय

दूध उत्पादकों और पशुपालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर राहत की खबर दी है। उन्नत प्रजनन तकनीकों, वैज्ञानिक पोषण पद्धतियों और रणनीतिक योजनाओं के माध्यम से सरकार ने दूध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए देशभर में 8 प्रमुख योजनाओं को सक्रिय रूप से लागू किया है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री ने जुलाई 2025 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। आइए, इन योजनाओं को विस्तार से समझते हैं:


1. राष्ट्रीय गोकुल मिशन: मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान सेवा

इस योजना का उद्देश्य उन जिलों में जहां कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 50% से कम है, वहां इसे बढ़ावा देना है। किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के वीर्य से निःशुल्क सेवा घर-घर जाकर उपलब्ध कराई जाती है


2. IVF तकनीक के जरिए नस्ल सुधार और ₹5000 की प्रोत्साहन राशि

गोजातीय पशुओं की नस्ल सुधार के लिए इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक अपनाई जा रही है। सफल गर्भधारण पर डेयरी किसानों को ₹5000 की सहायता दी जाती है।


3. लिंग-सॉर्टेड वीर्य पर 50% सब्सिडी

मादा बछड़ों के जन्म की संभावना बढ़ाने के लिए 90% तक सटीकता वाली लिंग-सॉर्टेड तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसकी लागत पर 50% सब्सिडी दी जाती है।


4. राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)

इस योजना में दो भाग हैं:

  • घटक A: दूध संग्रह, प्राथमिक शीतलन और परीक्षण उपकरणों की स्थापना।

  • घटक B: डेयरी सहकारिताओं को सशक्त कर उन्हें संगठित विपणन प्रणाली से जोड़ना।


5. एनएलएम-ईडीपी योजना: ₹50 लाख तक की सब्सिडी

राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) के तहत पशु प्रजनन फार्म और चारा इकाइयों की स्थापना के लिए ₹50 लाख तक की पूंजीगत सब्सिडी (50%) उपलब्ध कराई जाती है।


6. पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (AHIDF)

पशुपालन क्षेत्र में प्रसंस्करण और विविधीकरण के लिए 3% ब्याज दर पर ऋण सब्सिडी दी जाती है। इसका उद्देश्य असंगठित पशुपालकों को संगठित बाजारों से जोड़ना है।


7. 1962 किसान ऐप: वैज्ञानिक आहार की डिजिटल सलाह

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा विकसित ‘1962 किसान ऐप’ के जरिए किसान स्थानीय संसाधनों के आधार पर वैज्ञानिक रूप से संतुलित पशु आहार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।


8. पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

अब पशुपालन और मत्स्यपालन से जुड़े किसान भी केसीसी के माध्यम से कार्यशील पूंजी प्राप्त कर सकते हैं। यह सुविधा व्यक्तिगत, संयुक्त, स्व-सहायता समूहों और किराए पर लिए शेड वाले किसानों को भी मिलती है।


जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय भी जारी

सरकार ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए देशी नस्लों के संरक्षण और जलवायु-सहिष्णु चारा किस्मों के विकास पर विशेष जोर दिया है। इसके लिए ICAR द्वारा “राष्ट्रीय नवाचार परियोजना – जलवायु-सहिष्णु कृषि” की शुरुआत की गई है।


कितनी राशि जारी हुई?

पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत राज्यों को हजारों करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश को वित्त वर्ष 2024-25 में ₹150.76 करोड़ LHDCP के तहत प्रदान किए गए।


जलवायु प्रतिरोधी चारा किस्में विकसित

ICAR-IGFRI, झांसी द्वारा विकसित चारा बाजरा, ल्यूसर्न, सेटेरिया और सेवन घास की नई किस्में अब सूखा और गर्मी जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम हैं।

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