राजपाट

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कट्टर ईमानदार केजरीवाल का दर्द आप सुदर्शन फ़ाकिर के इस शेर से समझिये कि " मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक़ में फैसला देगा" ......

 

पाठक ने बढ़ाई भाजपाइयों की चिंता

देश की आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट हो गई है। राज्य सभा के सात सांसद पार्टी छोड़कर भाजपा में आ गए। उनका यह दल बदल कितना कानूनी है ये तो कानून तय करेगा लेकिन दूसरी पार्टी से लोगों का भाजपा में आना पार्टी के मूल नेताओं और कर्मठ कार्यकर्ताओं को हजम नहीं हो रहा है। जो सात सांसद आम आदमी पार्टी को छोड़ भाजपा में आये हैं उनमें अधिकांश का ताल्लुक पंजाब,हरियाणा और दिल्ली से है लेकिन एक नेता संदीप पाठक का सम्बन्ध छत्तीसगढ़ से है। संदीप पाठक एक हाई प्रोफाइल व्यक्ति हैं और उन्हें आम आदमी पार्टी का थिंक टैंक कहा जाता था। इसलिए लाजमी है कि भाजपा उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें काम भी देगी। चूँकि पाठक छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के एक गांव बतहा के निवासी हैं और उनकी प्राथमिक शिक्षा भी यहीं से हुई है। इसलिए छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं का चिंतित होना तो बनता ही है। छत्तीसगढ़ की भाजपा भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर आये एक नेता को अभी तक पचा नहीं पाई है और उन्हें इस बात की चिंता सताने लगी है कि कहीं संदीप पाठक को भी छत्तीसगढ़ में सक्रिय न कर दिया जाए। वैसे भी पाठक के आम आदमी पार्टी को छोड़ने की सबसे तीखी प्रतिक्रिया छत्तीसगढ़ में ही हुई जहाँ उनके कार्यकर्ताओं ने अपने थिंक टैंक को सैप्टिक टैंक कह दिया। खैर, ये नए भारत की राजनीति है यहाँ सब चलता है।

ईडी ने किसकी सुनी केंद्र की या कांग्रेस की

बीते कुछ वर्षों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पूरे देश में ताबड़तोड़ छापेमारी की और सैकड़ों केस बनाये। छत्तीसगढ़ में तो ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, उनके पुत्र चैतन्य बघेल, कांग्रेस सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे अधिकारी, नेता किसी को नहीं छोड़ा। इसीलिए कांग्रेस का यह आरोप रहता है कि ईडी केंद्र सरकार के कहने पर केवल कांग्रेस के नेताओं को निशाना बनाती है।तो लीजिये ईडी ने पुकार सुन ली और भाजपा की सरकार में मंत्री रहे और वर्तमान विधायक के भाई और रिश्तेदारों के घर छापा मार दिया। भाजपा नेता के इस भाई पर भारतमाला परियोजना में जालसाजी कर करोड़ों रुपए का मुआवजा लेने का आरोप है। कांग्रेस भी इस घोटाले पर कड़े तेवर दिखाते आई है लेकिन उसे भी भरोसा नहीं रहा होगा कि भाजपा नेता के इस भाई पर कोई कार्रवाई होगी। अब आप कांग्रेस के आरोप पर जरा ध्यान दीजिए कि ईडी केंद्र के इशारे पर चलती है तो इसका मतलब यह कार्रवाई भी केंद्र के इशारे पर मानी जाए ??? वैसे मान लेने में भी कोई बुराई नहीं है क्योंकि ये भाजपा नेता पिछले दो साल से विधानसभा में विपक्ष की कमी को पूरा कर रहे थे।

आत्मकथा और संस्मरण लिखवाने का चस्का

छत्तीसगढ़ के नेताओं को इन दिनों आत्मकथा और संस्मरण लिखवाने का चस्का लगा हुआ है। दरअसल इन नेताओं के समर्थकों को अब लगने लगा है कि उनके नेताजी को लाइमलाइट में रखने का यह बेहतर तरीका है। जब इन नेताओं को लगने लगता है कि हमारी चमक अब धुंधला रही है तो यह काम वे अपने समर्थकों से करवाते हैं। हालाँकि यह कोई नई बात नहीं है पुराने ज़माने के नेता और नौकरशाह भी किताबें लिखते रहे हैं अंतर बस इतना है कि वे लेखन खुद किया करते थे। वैसे भी अब इस तरह के पढ़ने लिखने वाले नेता राजनीति में आना बंद हो गए हैं। ज़माने की एक कड़वी सच्चाई है कि जनता बड़े बड़े तुर्रम नेताओं को भूल जाती है। ऐसे में किताब ही उन्हें इतिहास में बनाये रखती है। जबकि सोशल मीडिया में कितनी ही पोस्ट डाल दो इस दरिया में सब गुम हो जाता है। हमारे प्रदेश के दिग्गज नेता सत्यनारायण शर्मा पर किताब आ गई है। राज्य के एक और कद्दावर नेता बृजमोहन अग्रवाल पर भी एक किताब उनके जन्मदिन पर आने वाली है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा के अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह पर भी एक किताब बनकर तैयार है। आने वाले दिनों में अगर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, चरण दास महंत, रमेश बैस और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर भी किताब आ जाए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। देखा जाय तो हमारे राज्य के नेता केवल किताब ही तो लिखवा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बहन मायावती तो आपको याद होंगी जिन्होंने हाथियों के साथ साथ अपनी खुद की प्रतिमा भी लगवा ली थी। नेहरू जी भी इससे अछूते नहीं थे उन्होंने भारत एक खोज जैसी किताब तो लिखी और साथ में खुद को भारत रत्न भी दिलवा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से तो गुजरात में एक क्रिकेट स्टेडियम है। खैर, खुद को इतिहास में बनाये रखने की चाहत एक मानवीय स्वभाव है।

कट्टर ईमानदारी का पाखंड

इन दिनों आम आदमी पार्टी के सुप्रीम नेता कट्टर ईमानदार अरविन्द केजरीवाल और दिल्ली हाईकोर्ट की जज स्वर्णलता शर्मा के बीच जमकर विवाद चल रहा है। कट्टर ईमानदार केजरीवाल का दर्द आप सुदर्शन फ़ाकिर के इस शेर से समझिये कि ” मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है, क्या मेरे हक़ में फैसला देगा” ……और बस केजरीवाल ने खुद को कट्टर ईमानदार बताते हुए जज को हट जाने की सलाह दे दी। इस मसले का हल क्या होगा हम इस पर नहीं जा रहे, हमारी रुचि तो कट्टर ईमानदार में इसलिए है कि एक ऐसे ही कट्टर ईमानदार अधिकारी इस राज्य में भी होते थे। अपनी ईमानदारी वाली कट्टर छवि को स्थापित करने के लिए वे कई बार पाखंड के बहुत नजदीक चले जाते थे। लोकल ट्रेन में सफर करना और सरकारी वाहन को अगले स्टेशन में बुलाना, किसी मित्र के घर भोजन पर जाना और मेजबान मित्र की पत्नी को भोजन के सौ रुपये देना,, इस तरह की कट्टर ईमानदारी के उनके कई किस्से हैं। इस कट्टर ईमानदार अधिकारी के पुत्र पेशे से वकील हैं और सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के प्रकरण देखने का करोड़ों रुपया सरकार से वसूलते हैं। छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट में राज्य सरकार के अनेकों केस इन्हे दिए जाते हैं और दर्जनों विभागों में इन्हे विधिक सलाहकार भी बनाया गया है। सरकार भाजपा की रही हो या कांग्रेस की इनकी कट्टर ईमानदारी का जलवा कभी काम नहीं हुआ। जो लोग इस पूर्व ब्यूरोक्रेट को जानते हैं उन्हें पता है कि केजरीवाल की ईमानदारी और इनकी ईमानदारी में अधिक अंतर नहीं है। रिटायरमेंट के बाद भी चार चार सरकारी गाड़ी और पांच छह चपरासी दबाकर रखने वाला ऐसा कट्टर ईमानदार अधिकारी अपने देखा है कहीं……….

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