
दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के 3 आसान उपाय: गाय-भैंस डेयरी फार्म के लिए बेस्ट
दूध की अच्छी क्वालिटी (जैसे फैट और SNF) की हमेशा बाजार में ज्यादा मांग होती है, और यह सीधे आपकी कमाई पर असर डालती है। एनिमल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दूध की क्वालिटी बाहर से नहीं बनाई जाती, बल्कि यह गाय-भैंस की सही देखभाल और पोषण से ही आती है। इसलिए सिर्फ दूध की मात्रा बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि दूध की क्वालिटी बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। अच्छी बात यह है कि दूध की क्वालिटी सुधारने के लिए आपको कोई बड़ा खर्च या मुश्किल काम नहीं करना पड़ता। गाय-भैंस की रोजमर्रा की देखभाल में कुछ साधारण और आसान बदलाव करके आप दूध में एसएनएफ (सॉलिड-नॉट-फैट) को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। तो आइए जानते हैं डेयरी फार्म के लिए एक्सपर्ट्स सुझाएं गए 3 सबसे आसान और असरदार उपाय, जो आपके पशुओं को स्वस्थ रखेंगे और दूध की क्वालिटी में जल्दी सुधार लाएंगे।
दूध की गुणवत्ता कम होने से डेयरी किसान क्यों चिंतित हो जाते हैं?
एनिमल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि दूध की क्वालिटी अच्छी हो तो ही बाजार में सही दाम मिलता है। आजकल ग्राहक हों या डेयरी प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां सभी दूध खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता (क्वालिटी) जरूर जांचते हैं। क्योंकि दूध में मौजूद पोषक तत्वों (जैसे फैट और SNF) के आधार पर ही डेयरी फार्म वालों को भुगतान किया जाता है। इसी वजह से हर डेयरी किसान अपने गाय-भैंस के दूध की क्वालिटी को लेकर चिंतित रहता है। हालांकि गाय-भैंस का दूध कितना अच्छा है यह तय करने की शुरुआत फार्म से दूध निकालते समय ही हो जाती है। फार्म में पशु का दूध दुहने के दौरान पानी, धूल, गोबर या अन्य बाहरी चीजों दूध दूषित तो नहीं हुआ है, जिस बर्तन में दूध दुहना है वह अच्छी तरह से साफ है या नहीं। इन सब की जांच डेयरी कंपनियां फार्म पर ही जांच लेती हैं।
दूध की क्वालिटी कैसे बढ़ाएं?
डेयरी एक्सपर्ट्स का कहना है कि दूध और उससे बने सभी उत्पादों की क्वालिटी का सबसे बड़ा आधार सफाई है। दूध उतना ही अच्छा माना जाता है जितना वह साफ और गंदगी-रहित हो। अगर दुहाई के समय पशु शेड की गंदगी दूध में मिल जाए, तो दूध की क्वालिटी तुरंत खराब हो जाती है, जिसका सीधा असर दूध के दाम पर पड़ता है। इसलिए यदि आप दूध की क्वालिटी बढ़ाना और उसे लंबे समय तक अच्छा रखना चाहते हैं, तो साफ-सुथरे तरीके से दूध उत्पादन करना सबसे जरूरी है। इसके लिए फार्म पर ही कुछ आसान कदम अपनाने पड़ते हैं। सबसे पहला और जरूरी कदम यह है कि पशुओं को रोजाना नहलाया जाए, खासकर गर्मियों में। नहलाने से पशु संक्रमण और बीमारियों से दूर रहता है। पशुओं में बीमारी कम होगी तो दूध की क्वालिटी बेहतर होगी और दवाई-उपचार का खर्च भी बच जाएगा
सफाई और देखभाल जैसे दो जरूरी काम
खुरों की देखभाल: समय-समय पर अपनी गाय-भैंस के खुर जरूर कटवाते रहें। नियमित रूप से खुर कटवाने से पशु के पैरों में गंदगी जमा नहीं होती और वह संक्रमण से सुरक्षित रहता है। खास तौर पर खुरपका जैसी खतरनाक बीमारी पशुओं से दूर रहती है। तीसरी और सबसे अहम बात यह है कि पशु जिस जगह बैठता या खड़ा होता है, उस जगह यानी उसके बिस्तर या फर्श को हमेशा साफ रखा जाए। सर्दियों में अगर रबर की मैट बिछाई गई है, तो उसे रोजाना साफ करें। गर्मियों में यदि पशु कच्चे या पक्के फर्श पर बैठता है, तो उस जगह को भी अच्छी तरह धोकर साफ रखें। जब पशु का बैठने-खड़े होने वाला स्थान साफ रहता है, तो उस पर बीमारियों और संक्रमण का खतरा बहुत कम हो जाता है। इससे पशु स्वस्थ रहता है, दूध की क्वालिटी बनी रहती है और इलाज पर होने वाला खर्च भी बच जाता है।
दूध में फैट बढ़ाने के लिए पशुओं को क्या खिलाएं?
इसके अलावा, दूध में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने के लिए पशु को उच्च गुणवत्ता वाला चारा, सूखा (जैसे भूसा) और हरा चारा (जैसे बरसीम, जई) पर्याप्त मात्रा में मिलकर खिलाएं। फाइबर की मात्रा के लिए पशु को उसके कुल शरीर भार का 2 से 3% फाइबर युक्त सूखा चारा जरूर खिलाएं। बिनौला (कपास के बीज) और बिनौला खली फैट का एक बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत हैं, जिन्हें दाना मिश्रण में जरूर शामिल करें। सरसों, तिल, या सोयाबीन जैसे तेल वाले बीजों को भिगोकर या पीसकर खिलाना फैट (वसा) बढ़ाने में मदद करता है। दूध उत्पादन और फैट के लिए कैल्शियम और फास्फोरस जैसे खनिज बहुत जरूरी हैं। इसलिए पशु आहार में संतुलित मिनरल मिक्सचर रोजाना जरूर शामिल करें। कुछ विशेषज्ञ दाना मिश्रण में सोडियम बाईकार्बोनेट (मीठा सोडा) मिलाने की सलाह देते हैं, जो जुगाली को बढ़ाकर पेट का pH स्तर (एसिडिटी) संतुलित करता है।



