खेत खलिहान

सरसों की पछेती खेती: ज्यादा पैदावार और अधिक तेल के लिए 4 बेहतरीन किस्में

सरसों रबी सीजन की प्रमुख तिलहन फसल है और किसानों की पहली पसंद भी है, क्योंकि इसकी खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देती है। साथ ही इसमें कम सिंचाई, कम मेहनत और कम समय में बेहतर उत्पादन मिलता है। इसके अलावा, सरसों के तेल की डिमांड बाजारों में हमेशा बनी रहती है, जिससे इसकी फसल का बेहतरीन भाव मिलता है। यही कारण है कि सरसों किसानों के लिए सबसे लाभकारी फसल मानी जा रही है। लेकिन रबी सरसों की खेती के समय कई किसान अभी यह सोच में हैं कि कौन सी किस्म उगाएं ताकि उन्हें अच्छी पैदावार मिले और बंपर कमाई हो सके।

अगर आप दिसंबर में सरसों की बुवाई कर रहे हैं और ज्यादा उत्पादन, अधिक तेल मात्रा और अच्छी गुणवत्ता वाली फसल चाहते हैं, तो आप सरसों की इन 4 सबसे बेहतरीन किस्मों की बुवाई कर सकते हैं। ये सरसों की किस्में किसानों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि आप इन सभी चार किस्मों के बीज सस्ते दामों पर NSC (राष्ट्रीय बीज निगम) से सीधे अपने घर पर ऑनलाइन मंगवा सकते हैं। आइए जानते हैं कि पैदावार बढ़ाने वाली ये उत्तम (उन्नत) किस्में कौन-सी हैं।

रबी सरसों की उन्नत किस्में कौन-सी हैं?

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन (NMEO-OS) चला रही है। इस मिशन के तहत रेपसीड-सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल जैसी मुख्य तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका असर अब साफ दिख रहा है, किसान तेजी से तिलहन फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें सरसों सबसे पसंदीदा फसल बन गई है, क्योंकि यह कम पानी, कम मेहनत और कम लागत में अधिक मुनाफा देती है। खास बात यह है कि सरकार ने विपणन सीजन 2026–27 के लिए रबी सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6,200 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है।

किसानों की सुविधा के लिए राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) ऑनलाइन सरसों की बेहतरीन किस्में जैसे PM-30, RH-761, RH-725 और गिरिराज (GIRIRAJ) का उच्च गुणवत्ता वाला बीज उपलब्ध करा रहा है। आप इन बीजों को एनएससी के ऑनलाइन स्टोर पर जाकर आसानी से ऑर्डर कर किफायती दामों में हासिल कर सकते हैं।

कम अवधि में बंपर पैदावार देने वाली किस्म- PM-30 सरसों

PM-30 (पूसा मस्टर्ड-30) सरसों की एक खास किस्म किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय होती जा रही है। यह भारतीय भूरी सरसों की एक उन्नत किस्म है, जिसके बीज गहरे भूरे रंग के होते हैं। इसे खासतौर पर कम इरुसिक एसिड वाली खाने योग्य सरसों के रूप में विकसित किया गया है। इसे 2013 में उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए जारी की गई थी। यह किस्म आईसीएआर-आईएआरआई (ICAR–IARI) द्वारा विकसित की गई है और मध्यम अवधि में तैयार हो जाती है। इसे समय पर बुवाई और सिंचित खेती के लिए खासतौर पर उपयुक्त माना जाता है।

यह किस्म पाले को आसानी से सहन कर लेती है और एलिसियम (जंग) तथा अल्टरनेरिया (झुलसा) जैसे बड़े रोगों का कम प्रकोप होता है। सही तरीके से खेती करने पर इसकी औसत पैदावार 25–27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है। बीज में लगभग 37.7% तक तेल मात्रा पाई जाती है। PM-30 सरसों बीज की कीमत भी किफायती है। इसका 1 किलो का पैकेट आपको 13% छूट के बाद लगभग 175 रुपए में मिल जाता है।

सरसों की उच्च उपज वाली किस्म – RH-761 किस्म

RH-761, जिसे काला सोना भी कहा जाता है। यह सरसों की एक उन्नत किस्म है, जिसे हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया है। यह एक अगेती किस्म है, जो कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में बहुत अच्छी पैदावार देती है और चाहें तो इसे सिंचित खेतों में भी आसानी से उगाया जा सकता है।

यह किस्म सूखे और पाले दोनों को सहन कर लेती है। साथ ही यह सफेद रतुआ और एफिड्स जैसे आम रोगों-कीटों के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है। इसके दाने भी मोटे और तेल की मात्रा 30-48% तक होती है। सही प्रबंधन के साथ इस किस्म से 25–27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार ले सकते हैं।

बुवाई के 136 से 145 दिन बाद यह कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। वहीं बीजाई के करीब 45 से 55 दिन के अंदर पौधों में फूल आना शुरू हो जाते हैं। सरसों की वैरायटी RH-761 (काला सोना) बीज की कीमत भी किफायती है। 1 किलो वाला पैकेट आपको लगभग 18% छूट के साथ करीब 160 रुपए में मिल जाता है।

RH-725 सरसों: अधिक पैदावार देने वाली ऑलराउंडर किस्म

RH-725 सरसों हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार द्वारा विकसित एक उच्च गुणवत्ता वाली ऑलराउंडर किस्म है। यह किस्म समय पर बुवाई और सिंचित क्षेत्रों के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है। इसे बारानी (वर्षा आधारित कृषि भूमि) क्षेत्रों में आसानी से उगाया जा सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह कीटों और रोगों के प्रति काफी सहनशील है, जिससे फसल की सुरक्षा और उत्पादन दोनों बेहतर रहता है।

RH-725 की मुख्य विशेषताएं

  • औसत बीज उत्पादन: इसकी औसत पैदावार लगभग 24–26 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मिल सकती है।

  • तेल मात्रा: इस किस्म के दानों में औसतन 40% तक तेल पाया जाता है। फलियां लंबी और मोटी, तना मजबूत होता है, जिससे फसल आसानी से गिरती नहीं है।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: इसमें जड़ और तना गलन जैसी बीमारियों का प्रकोप कम होता है।

  • कृषि पारिस्थितिक स्थिति: बारानी और सिंचित, दोनों तरह की स्थितियों में समय पर बुवाई के उपयुक्त है

  • फूल और पकने की अवधि: बुवाई के लगभग 45–55 दिन बाद फूल आ जाते हैं। फसल बुवाई के 135–145 दिन में पक कर कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

  • RH-725 सरसों बीज का 1 किलो पैक आप विभिन्न सरकारी ऑनलाइन पोर्टल और बीज केंद्रों से किफायती दरों पर खरीद सकते हैं। आम तौर पर यह पैकेट 36 फीसदी छूट के साथ 160 रुपए रेंज में उपलब्ध है।

गिरिराज सरसों (DRMRIJ-31): उच्च उपज और उच्च तेल मात्रा वाली किस्म

गिरिराज सरसों (DRMRIJ-31) एक उच्च उपज और उच्च तेल वाली किस्म है, जिसे ICAR के सरसों अनुसंधान निदेशालय, भरतपुर ने विकसित किया है। यह किस्म 120‑140 दिन में पक जाती है और सही देखभाल के साथ इसकी पैदावार लगभग 25‑30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। इस किस्म की फलियां लंबी और दानों से भरी होती हैं और यह सामान्य रोगों के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता रखती है। गिरिराज सरसों राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में समय पर बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त है।

बीज कीमत: गिरिराज (DRMRIJ‑31) सरसों किस्म का 1 किलो वाला बीज पैकेट लगभग 150 रुपए में उपलब्ध है।

सरसों की खेती: मिट्टी की तैयारी से बुवाई तक किसान-सुझाव

सरसों की अच्छी फसल के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी सबसे अच्छी होती है। बीज बोने से पहले यह जरूरी है कि खेत की मिट्टी को एकदम भुरभुरा बना लिया जाए। इसके लिए आप ट्रैक्टर से जुड़े यंत्र जैसे पावर वीडररोटावेटर, कल्टीवेटर या हल (Plough) का इस्तेमाल करें। ये यंत्र मिट्टी की जुताई करके, बड़े ढेलों (मिट्टी के टुकड़ों) को तोड़कर और खरपतवारों को हटाकर मिट्टी को बारीक और हवादार बना देते हैं।

मिट्टी तैयार करते समय ही गोबर की खाद (जैविक शक्ति के लिए), डीएपी (DAP), यूरिया और सल्फर (सरसों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए जरूरी) खाद और उर्वरकों का बेसल डोज (पहली खुराक) जरूर दें। रबी की फसल सरसों की बुवाई का सबसे सही समय सितंबर से अक्टूबर के बीच का है।

सीड ड्रिल मशीन या रोटो सीड ड्रिल मशीन का उपयोग करके बीज को पंक्तियों (लाइन) में बोएं। पंक्तियों के बीच 45 से 50 सेंटीमीटर की दूरी रखें। जिन किसानों के खेत छोटे हैं, उनके लिए मैनुअल सीडर मशीन से सरसों की बुवाई करना एक सस्ता और प्रभावी विकल्प है। अगर आप इस सही तरीके से सरसों की खेती करते हैं, तो किसानों को निश्चित रूप से अधिक पैदावार मिलती है।

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