
MP Cabinet: 16 साल से कम उम्र के बच्चों की कोचिंग पर लगेगी रोक
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार रविवार, 19 जुलाई को भोपाल के जगदीशपुर (पूर्व में इस्लाम नगर) में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को मंजूरी दे सकती है। इनमें मध्य प्रदेश निजी कोचिंग संस्थान (रजिस्ट्रेशन एवं विनियमन) विधेयक, 2026 और मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक प्रमुख हैं। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इन विधेयकों को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। इसी विशेष बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे पर भी चर्चा प्रस्तावित है।
16 वर्ष से कम उम्र के विद्यार्थियों के कोचिंग प्रवेश पर प्रस्तावित रोक
प्रस्तावित निजी कोचिंग संस्थान विधेयक का उद्देश्य कोचिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। विधेयक के अनुसार 16 वर्ष से कम आयु के विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं, जैसे जेईई और नीट-यूजी की तैयारी के लिए निजी कोचिंग संस्थानों में प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। इसका असर मुख्य रूप से कक्षा 10 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों पर पड़ेगा। सरकार का मानना है कि कम उम्र में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक विकास को प्रभावित करता है। नए कानून के लागू होने के बाद प्रदेश (MP Cabinet) में संचालित प्रत्येक निजी कोचिंग संस्थान का पंजीकरण अनिवार्य होगा। बिना रजिस्ट्रेशन कोई भी संस्थान संचालन नहीं कर सकेगा। साथ ही छात्रों को आकर्षित करने के लिए फर्जी चयन प्रतिशत, गारंटीड सफलता या अन्य भ्रामक दावे वाले विज्ञापनों पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
बीच में कोचिंग छोड़ने पर 10 दिन में लौटानी होगी फीस
विधेयक में विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए फीस वापसी का स्पष्ट प्रावधान भी जोड़ा गया है। यदि कोई छात्र निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले कोचिंग छोड़ देता है, तो संस्थान को उपयोग की गई अवधि का शुल्क काटकर शेष राशि प्रो-राटा (यथानुपात) के आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे फीस वापसी को लेकर होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
सरकार निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक के माध्यम से निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्तमान में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए न्यूनतम 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता है। प्रस्तावित संशोधन में इसकी जगह ‘पर्याप्त भूमि’ शब्द जोड़ा जाएगा। इससे बहुमंजिला परिसरों और शहरी क्षेत्रों में भी निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का रास्ता खुल सकेगा। सरकार का तर्क है कि देश के कई राज्यों में कम भूमि पर भी आधुनिक निजी विश्वविद्यालय सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। यदि दोनों विधेयकों को विधानसभा से मंजूरी मिल जाती है, तो मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली, विद्यार्थियों के अधिकार और निजी उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना के नियमों में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। सरकार का दावा है कि इन सुधारों से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, छात्र हितैषी और निवेश के अनुकूल बनेगी। वहीं शिक्षा विशेषज्ञों की नजर अब मानसून सत्र पर टिकी है, जहां इन प्रस्तावित कानूनों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।



