पशुधन संसार

महासमुंद : जिले में 15 मार्च से खुरहा-चपका रोग के खिलाफ टीकाकरण अभियान

टीम गांव-गांव जाकर डोर-टू-डोर पशुओं का टीकाकरण करेंगे

महासमुंद। पशुधन में फैलने वाली खुरहा-चपका रोग की रोकथाम के लिए भारत सरकार के राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (National Animal Disease Control Programme) के अंतर्गत जिले में टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में महासमुंद जिले में खुरहा चपका रोग टीकाकरण का सातवां चरण आगामी 15 मार्च 2026 से प्रारंभ किया जाएगा। इस अभियान के तहत पशुधन विभाग की टीम गांव-गांव जाकर डोर-टू-डोर पशुओं का टीकाकरण करेंगे तथा सभी टीकाकरण की जानकारी भारत पशुधन पोर्टल में दर्ज की जाएगी। उपसंचालक पशु चिकित्सक सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि खुरहा-चपका रोग एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो पिकॉर्ना वायरस के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है। इस वायरस के सात अलग-अलग प्रकार पाए जाते हैं जिनमें O, A, C, SAT1, SAT2, SAT3 और Asia-1 शामिल हैं। यह रोग संक्रमित पशुओं के सीधे संपर्क, दूषित उपकरण, वाहन, चारा और पानी के माध्यम से तेजी से फैलता है और कई बार हवा के माध्यम से भी संक्रमण फैल सकता है। इस रोग से प्रभावित पशुओं में मुंह, पैरों और थनों पर दर्दनाक फफोले दिखाई देते हैं तथा 105 से 108 डिग्री फ़ारेनहाइट तक तेज बुखार आता है। इसके कारण दूध उत्पादन में भारी कमी हो जाती है, गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है और पशुओं का वजन भी कम होने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार एफएमडी के खिलाफ टीकाकरण इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। सामान्यतः 4 से 6 महीने की आयु के गोवंशीय और भैंस वंशीय पशुओं को यह टीका लगाया जाता है, जिसके बाद हर 6 से 12 महीने में बूस्टर डोज दी जाती है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2019 से राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश में खुरहा-चपका रोग को वर्ष 2025 तक नियंत्रित करना और वर्ष 2030 तक पूरी तरह समाप्त करना है। इसी दिशा में जिले में लगातार टीकाकरण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. अंजना नायडू ने बताया कि 1 मार्च 2026 से जिले में पशुओं को कृमिनाशक दवा भी पिलाई जा रही है। उन्होंने जिले के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपने गोवंशीय एवं भैंस वंशीय पशुओं को कृमिनाशक दवा अवश्य पिलवाएं और 15 मार्च से शुरू होने वाले टीकाकरण अभियान में अपने पशुओं का टीकाकरण करवाकर इस गंभीर बीमारी से बचाव सुनिश्चित करें।

Related Articles

Back to top button