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चने की फसल के लिए खतरनाक हैं ये 3 कीट, हो सकता है भारी नुकसान

रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसल चना देश के लाखों किसानों की आय का अहम जरिया है। अच्छी पैदावार की उम्मीद में किसान खेतों में मेहनत करते हैं, लेकिन मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ कीटों का बढ़ता प्रकोप चने की फसल के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासकर फली छेदक, दीमक और कटुआ जैसे कीट चने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यदि समय रहते इन कीटों की पहचान और रोकथाम न की जाए, तो किसानों को 30 से 60 फीसदी तक उपज का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि किसान इन प्रमुख कीटों के लक्षण और उनसे बचाव के उपायों को अच्छी तरह समझा जाए।

तो आइए जानते हैं, चने की फसल को हानि पहुंचाने वाले कीटों की पहचान, लक्षण व बचाव के उपाय के बारे में पूरी जानकारी।

फली छेदक कीट, सबसे ज्यादा नुकसानदायक

फली छेदक कीट को चने का सबसे खतरनाक दुश्मन माना जाता है। इसके वयस्क को पतिंगा कहा जाता है, जबकि इसके लार्वा यानी इल्ली फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। शुरुआती अवस्था में ये कीट चने के मुलायम तनों और पत्तियों को खाते हैं। जैसे ही फसल में फूल और फलियां आने लगती हैं, यह कीट फलियों में छेद कर अंदर के दानों को खा जाता है। फली छेदक के प्रकोप से चने की पैदावार में 30–40 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

फली छेदक से बचाव के लिए क्या करें उपाय

इस कीट से बचाव के लिए किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाना चाहिए। खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाकर नर कीटों को पकड़ा जा सकता है। इसके अलावा नीम आधारित कीटनाशक, जैविक नियंत्रण जैसे एनपीबी (NPB) और मित्र कीटों को बढ़ावा देना भी फायदेमंद होता है। फसल चक्र अपनाने से भी कीटों का प्रकोप कम किया जा सकता है। यदि कीटों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो रासायनिक नियंत्रण जरूरी हो जाता है। इसके लिए इंडोसल्फान 35 EC, क्वीनालफॉस 20 EC, क्लोरोपाइरीफॉस 20 EC या प्रोफेनोफॉस 50 EC को उचित मात्रा में पानी में घोलकर छिड़काव किया जा सकता है।

चने की फसल में दीमक का खतरा

दीमक चने की फसल का एक और गंभीर कीट है, जो बुवाई से लेकर कटाई तक नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर सूखे और कम नमी वाले क्षेत्रों में इसका प्रकोप अधिक देखा जाता है। दीमक प्रभावित पौधे पीले पड़कर मुरझाने लगते हैं और धीरे-धीरे सूख जाते हैं। यह कीट जड़ों और तनों को अंदर से खाकर खोखला कर देता है। दीमक के प्रकोप से चने के उत्पादन में 30–60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई है।

दीमक से बचाव के लिए क्या करें उपाय

दीमक से बचाव के लिए खेत में पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करें। जैविक नियंत्रण के तहत विवेरिया वैसियाना नामक फफूंद के स्पोर को ताजे गोबर में मिलाकर गड्ढों में डालना लाभकारी होता है। यदि दीमक का प्रकोप बहुत अधिक हो जाए, तो रासायनिक नियंत्रण अपनाया जा सकता है। इसके लिए इंडोसल्फान 35 EC या क्लोरोपाइरीफॉस 20 EC को सिंचाई के पानी के साथ या बालू में मिलाकर सिंचाई से पहले खेत में छिड़काव करें।

कटुआ कीट, शुरुआती अवस्था में पहुंचाता है सबसे ज्यादा नुकसान

कटुआ कीट चने की शुरुआती अवस्था में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इसके प्रकोप से पौधे जमीन की सतह से कट जाते हैं, जिससे अंकुरण रुक जाता है और खेत में पौधों की संख्या घट जाती है। यह कीट रात के समय सक्रिय रहता है और दिन में मिट्टी के ढेलों या खरपतवार के नीचे छिपा रहता है। इसके कारण दानों का विकास रुक जाता है और फलियां खोखली रह जाती हैं।

कटुआ कीट से बचाव के लिए क्या करें उपाय

कटुआ से बचाव के लिए खेत के चारों ओर सूरजमुखी जैसी आकर्षक फसल लगाई जा सकती है। खेत में सूखी घास के छोटे-छोटे ढेर बनाएं, जिनमें कीट दिन में छिपते हैं, इन्हें सुबह इकट्ठा कर नष्ट कर दें। वयस्क कीट रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं, इसलिए लाइट ट्रैप लगाना भी प्रभावी उपाय है। साथ ही नीम तेल और जैविक कीटनाशकों का उपयोग कर कटुआ कीट को नियंत्रित किया जा सकता है।

कीटों से बचाव करें पाएं चने की बेहतर पैदावार

फली छेदक, दीमक और कटुआ, ये तीनों कीट चने की फसल के लिए बेहद खतरनाक हैं। समय पर पहचान और सही बचाव उपाय अपनाकर किसान इनसे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं और चने की बेहतर पैदावार हासिल कर सकते हैं

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