
गेहूं की टॉप 5 हाई-यील्ड किस्में: पाएं 70 क्विंटल/हेक्टेयर तक रिकॉर्ड पैदावार
रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही देशभर के किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। हर साल किसान सबसे बड़ी चिंता इसी बात की करते हैं कि कौन-सी गेहूं की किस्म उन्हें अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और कम रोग जोखिम के साथ अधिक लाभ दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही किस्म का चुनाव फसल की सफलता की कुंजी है, क्योंकि हर क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी गेहूं की किस्मों पर सीधा असर डालती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने इस सीजन के लिए पांच हाई-यील्ड और रोग-प्रतिरोधी गेहूं की किस्मों की सिफारिश की है।
इन किस्मों से किसानों को औसतन 45 से 50 क्विंटल/हेक्टेयर और अधिकतम 60 से 70 क्विंटल/हेक्टेयर तक की पैदावार मिल सकती है। ये किस्में न केवल उत्पादकता में बेहतरीन हैं बल्कि उच्च गुणवत्ता का दाना, अच्छी चपाती गुणवत्ता और प्रोसेसिंग अनुकूलता जैसी विशेषताएं भी प्रदान करती हैं। आज हम आपको इन टॉप-5 गेहूं किस्मों की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं, तो आइए जानते हैं गेहूं की इन टॉप 5 किस्मों के बारे में।
मुक्तिनाथ 3170
गेहूं की मुक्तिनाथ 3170 (Muktinath Wheat 3170) किस्म कठोर दाने, पिसाई और प्रोसेसिंग के लिए उत्तम है। यह किस्म बदलते मौसम में भी स्थिर उत्पादन दे सकती है। यह किस्म सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इस किस्म की औसत उपज 45.03 क्विं./हेक्टेयर है और यह किस्म 59.8 क्विं./हेक्टेयर तक पैदावार दे सकती है। खास बात यह है कि यह किस्म रोग प्रतिरोधी किस्म है। यह भूरा व पत्ती रतुआ रोग की प्रतिरोधी है। इस किस्म को महाराष्ट्र और कर्नाटक (प्रायद्वीपीय सिंचित क्षेत्र) के लिए उपयुक्त पाया गया है। ऐसे में महाराष्ट्र और कर्नाटक के लाखों किसान इस किस्म को तेजी से अपना रहे हैं क्योंकि यह जलवायु बदलाव का दबाव सहने में सक्षम है।
जीडब्ल्यू 451
गेहूं की जीडब्ल्यू 451 (GW 451) किस्म का दाना अत्यधिक कठोर होता है। यह उच्च तापमान में भी स्थिर उत्पादन दे सकती है। यह किस्म आटा और सेमोलिना उद्योग के लिए पसंदीदा किस्म है। यह किस्म खासतौर पर गुजरात के गर्म क्षेत्रों में लोकप्रिय है और उद्योग आधारित खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस किस्म की औसत उपज 44.14 क्विं./हेक्टेयर है। वहीं इसकी अधिकतम उपज क्षमता 57.55 क्विं./हेक्टेयर तक हो सकती है। यह किस्म भूरा रतुआ रोग प्रतिरोधी किस्म है।
एचआई (HI) 1633
गेहूं की एचआई (HI) 1633 (Pusa Wheat 1633) उच्च प्रोटीन और बेहतरीन चपाती गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। यह किस्म मध्य भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए आदर्श है। यही कारण है कि यह किस्म किसानों द्वारा तेजी से अपनाई जा रही है। यह किस्म उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में संतुलित मानी जाती है और खाद्यान्न बाजार में इसकी खूब मांग रहती है। इस किस्म की औसत उपज 49.2 क्विं./हेक्टेयर और इससे अधिकतम उपज क्षमता 67.9 क्विं./हेक्टेयर है। यह किस्म पीला व भूरा रतुआ रोग के लिए प्रतिरोधी किस्म है। यह किस्म मध्य भारत में मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ के लिए उपयुक्त मानी गई है।
करन नरेंद्र
गेहूं की करन नरेंद्र (Karan Narendra / DBW 222) किस्म के दोने की गुणवत्ता बेहतरीन होती है। यह किस्म चपाती और ब्रेड दोनों के लिए उपयुक्त है। यह किस्म पूर्वी भारत के आर्द्र क्षेत्रों में स्थिर पैदावार दे सकती है। यह किस्म उन क्षेत्रों में भी अच्छा प्रदर्शन करती है जहां तापमान और नमी में उतार-चढ़ाव रहता है। ऐसे में यह किस्म बिहार, बंगाल, यूपी पूर्वी क्षेत्र के लिए उपयुक्त मानी गई है। गेहूं की इस किस्म की औसत उपज 48.9 क्विं./हेक्टेयर और संभावित उपज 62.0 क्विं./हेक्टेयर है। यह किस्म भी भूरा रतुआ के प्रति प्रतिरोधी किस्म है।
पीबीडब्ल्यू 826
गेहूं की पीबीडब्ल्यू ( PBW) 826 किस्म अत्यधिक उत्पादन देने वाली किस्म मानी जाती है। इस किस्म का दाना कठोरता और पोषण में श्रेष्ठ है। यह किस्म पूर्वी भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। PBW 826 को इस बार ‘टॉप हाई-यील्ड किस्म’ के रूप में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है। इसकी औसत उपज 49.7 क्विं./हेक्टेयर और संभावित उपज 70.5 क्विं./हेक्टेयर (रिकॉर्ड स्तर) तक है। यह किस्म भी भूरा रतुआ रोग के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। इस किस्म को पूर्वी भारत में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वी यूपी के लिए उपयुक्त माना गया है।
किसान कैसे चुनें सही गेहूं की किस्म
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान को अपनी मिट्टी, पानी की उपलब्धता, क्षेत्र की जलवायु और बाजार की मांग को देखकर किस्म का चयन करना चाहिए।
- यदि आप औद्योगिक गुणवत्ता वाले गेहूं चाहते हैं तो GW 451 चुनें
- उच्चतम पैदावार चाहते हैं तो PBW 826 और HI 1633 किस्म का चुनाव करें।
- कम बारिश या बदलते मौसम वाले क्षेत्र के Muktinath 3170 किस्म अच्छी मानी गई है।
- पूर्वी भारत के लिए Karan Narendra और PBW 826 का चुनाव कर सकते हैं।
किन राज्यों के लिए अधिक उपयुक्त है गेहूं की ये किस्में
उपरोक्त गेहूं की किस्में विभिन्न राज्यों के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त हैं, जिनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इस रबी सीजन में यदि किसान सही किस्मों का चयन करते हैं तो आसानी से 60–70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज प्राप्त कर सकते हैं। ये सभी किस्में रोग-प्रतिरोधी हैं और बदलते मौसम में भी स्थिर प्रदर्शन देती हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इन हाई-यील्ड किस्मों के इस्तेमाल से किसान अपनी पैदावार और लाभ दोनों बढ़ा सकते हैं।



