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खरीफ की बुवाई 1,110 लाख हेक्टेयर के पार, चावल और मक्का में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

खरीफ सीजन 2025 की बुवाई में इस बार जोरदार प्रगति देखी गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 12 सितंबर 2025 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खरीफ फसलों का कुल रकबा 1,110.80 लाख हेक्टेयर को पार कर गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 15 लाख हेक्टेयर अधिक है और पिछले पांच वर्षों के औसत रकबे से भी काफी अधिक है, जो मौजूदा मौसम में किसानों की बढ़ती भागीदारी और अनुकूल मानसून की स्थिति को दर्शाता है।

चावल और मक्का की बुआई में जबरदस्त बढ़ोतरी

खरीफ सीजन में चावल की बुआई सबसे प्रमुख होती है, और इस बार इसका रकबा 438.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले 8 लाख हेक्टेयर अधिक है, जो विशेष रूप से पूर्वी भारत, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बंगाल जैसे राज्यों में बेहतर वर्षा और सरकारी योजनाओं की वजह से संभव हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, चावल की बुआई में यह तेजी खाद्य सुरक्षा और निर्यात दोनों के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। इसी तरह, मक्का की खेती ने भी इस बार रिकॉर्ड बुआई दर्ज की है। मोटे अनाजों की कुल बुआई 192.91 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है, जिसमें 10.5 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी अकेले मक्का की है। मक्का की मांग न केवल खाद्यान्न के रूप में, बल्कि चारे और औद्योगिक उपयोगों, विशेषकर बायो एथेनॉल उत्पादन में भी लगातार बढ़ रही है, जिससे इसकी बुआई को बल मिला है।

दालों की खेती में मिला-जुला रुझान

दालों की खेती का रकबा इस सीजन में 118.06 लाख हेक्टेयर रहा है, जिसमें कुल मिलाकर मामूली वृद्धि देखी गई है। हालांकि, इस श्रेणी में मिश्रित रुझान सामने आए हैं। उड़द की बुआई में वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि तुअर (अरहर) और मूंग की बुआई में हल्की गिरावट देखी गई है। दालों की कीमतें और खरीदी नीतियां भी रकबे को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल रही हैं।

तिलहनों में गिरावट, सोयाबीन बना चिंता का कारण

तिलहन फसलों की बुआई में इस बार गिरावट का रुझान सामने आया है। इस सीजन में तिलहनों का कुल रकबा 188.81 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल की तुलना में करीब 5 लाख हेक्टेयर कम है। इसका सबसे बड़ा कारण सोयाबीन की बुआई में लगभग 6 लाख हेक्टेयर की गिरावट है। विशेषज्ञों के अनुसार, सोयाबीन की कीमतों में अनिश्चितता, पिछले वर्षों में हुए नुकसान और मानसून की देरी जैसे कारणों से किसान तिलहन फसलों की ओर कम झुके हैं। हालांकि, मूंगफली की बुआई में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जो विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में सकारात्मक रुझान को दिखाती है।

गन्ना, कपास और अन्य फसलें

गन्ने की खेती का रकबा 57.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल से कुछ अधिक है। यह चीनी मिलों और इथेनॉल उत्पादन की योजनाओं के लिहाज से शुभ संकेत है। चीनी उद्योग के लिए यह रकबा बेहतर आपूर्ति और उत्पादन की संभावना बढ़ाता है। वहीं दूसरी ओर, कपास, जूट और मेस्टा की बुआई में पिछले साल की तुलना में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कपास की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कीट समस्याएं और अन्य जोखिमों के कारण किसान कुछ हद तक इन फसलों से पीछे हटे हैं।

कृषि उत्पादन के लिहाज से सकारात्मक संकेत

इस सीजन में कुल खरीफ बुआई रकबे का 1,110 लाख हेक्टेयर के पार जाना भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। चावल, मक्का और मोटे अनाजों की बुआई में तेजी से यह उम्मीद की जा रही है कि इस साल खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। कृषि मंत्रालय का कहना है कि सरकार द्वारा समय पर खाद-बीज की आपूर्ति, किसानों को डिजिटल माध्यम से जानकारी देना, मौसम पूर्वानुमान की पहुंच और MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) नीतियों के चलते किसान अब पहले से अधिक योजनाबद्ध ढंग से बुआई कर रहे हैं।

खरीफ सीजन 2025 में बन सकता है अधिक उत्पादन का रिकॉर्ड

हालांकि तिलहन और कुछ दालों में गिरावट चिंता का विषय है, लेकिन कुल मिलाकर खरीफ सीजन 2025 की बुआई के आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारतीय कृषि क्षेत्र मजबूती से आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मौसम अनुकूल रहा और फसलों को समय पर बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था सुचारू रही, तो देश खाद्यान्न उत्पादन के नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ सकता है।

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