
तिल की इन 6 उन्नत किस्मों से पाएं अधिक पैदावार, सरकार दे रही सब्सिडी
किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सरकार की ओर से किसानों को तिल की खेती पर सब्सिडी दी जा रही है। योजना के तहत सरकार किसानों को तिल की 6 बेहतर पैदावार देने वाली किस्मों के बीजों की खरीद पर अनुदान दे रही है। वहीं कृषि विभाग द्वारा किसानो को वैज्ञानिक तरीके से तिल की खेती की विधियों की जानकारी देकर उत्पादन बढ़ाने में सहायता की जा रही है। सरकार का मानना है कि उसके इस कदम से न केवल किसानों की खेती की लागत कम होगी बल्कि उत्पादन में बढ़ोतरी होने से किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
तिल की किन किस्मों पर मिल रही है सब्सिडी
कृषि विभाग ने तिल की छह प्रमुख उन्नत किस्में विकसित की हैं जिनमें आर.टी.-346, आर.टी.-351, गुजरात तिल-6, आर.टी.-372, एम.टी.-2013-3 और बी.यू.ए.टी. तिल-1 शामिल हैं। इन किस्मों का चयन किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर क्वालिटी प्रदान करता है। सरकार बीज अनुदान के तहत 95 रुपए प्रति किलो की दर से बीज उपलब्ध कराती है जिससे किसानों की लागत कम होती है।
उन्नत बीजों से कैसे करें तिल की खेती
तिल की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की बलुई दोमट भूमि जिसमें pH मान 6.0 से 7.5 के बीच हो, तिल की खेती के लिए उत्तम होती है। खरीफ सीजन में जुलाई के अंतिम सप्ताह तक तिल की बुआई की जा सकती है। खेत में कतार से कतार की दूरी 30 से 45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी होनी चाहिए, जिससे पौधों को पर्याप्त पोषण और वृद्धि का अवसर मिल सके। बीज बोने से पहले किसान थिरम या कार्बेंडाजिम जैसे कीटनाशक से बीजोपचार कर सकते हैं ताकि बीज और मिट्टी जनित रोगों से बचाव हो। साथ ही जैविक कीटनाशी ट्राइकोडर्मा का प्रयोग भी बीज उपचार के लिए उपयोगी है।
तिल की खेती में कैसे करें रोग-कीट और खरपतवार नियंत्रण
तिल की खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए बुआई के तुरंत बाद पेंडीमेथालिन का छिड़काव करना लाभकारी होता है। बरसात के समय सिंचाई की जरूरत नहीं होती, लेकिन फूल आने और दान भरने की अवस्था में सिंचाई आवश्यक होती है। तना और फल सड़न रोग से बचाव के लिए थायोफेनेट मिथाइल या कार्बेंडाजिम का छिड़काव करना चाहिए। पत्ती झुलसा रोग के लिए मैनकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग आवश्यक है। कीट नियंत्रण के लिए क्विनालफॉक्स या डाईमेथोयेट जैसे कीटनाशकों का छिड़काव आर्थिक नुकसान से बचाव हेतु किया जा सकता है।
वैज्ञानिक विधि से तिल की खेती पर कितना मिल सकता उत्पादन
तिल की कटाई तब करनी चाहिए जब 70 से 80 प्रतिशत फलिया पीली पड़ जाएं। कटाई के बाद फसल को अच्छी तरह धूप में सुखाकर मड़ाई करनी चाहिए। परंपरागत खेती में तिल का उत्पादन 4 से 6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है, जबकि वैज्ञानिक विधि अपनाने पर यह 8 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बढ़ सकता है। इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब एक लाख रुपए तक की आय हो सकती है।



