खेत खलिहान

मेहनत और लगन से लिखी आरती साठे ने सफलता कि इबारत

डॉ आरती अरोमा थैरेपी विशेषज्ञ भी है और सुगंध विज्ञान की विशेषज्ञ है भी उनका एक बहुत बड़ा कार्यक्षेत्र है फूलों की खेती और उसके द्वारा चिकित्सा

 

रायपुर । डॉ आरती साठे सफलता की एक अनूठी मिसाल जिनका नाम आज सिर्फ शहर में देश में ही नहीं कुछ बाहरी देशों फ्लोरिडा कतर में भी जाना जाता हैं जिनके नाम हजारों राज स्तरीय और राष्ट्र स्तरीय पुरस्कार भी है और अपने साथ डेढ़ लाख सदस्यों की टीम जुड़ी हुई है और न जाने कितने स्व सहायता समूह को मार्गदर्शन दे कर उनका आर्थिक जीवन संवार रही है

डॉ आरती विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूर्ण कर मेडिकल कॉलेज में एनाटॉमी की सहायक प्राध्यापिका के पद पर कार्यरत रहते हुए समाज शास्त्र में मास्टर डिग्री ,बैचलर ऑफ जर्नलिज्म ,फाइन आर्ट आदि विषयों में गोल्ड मेडल प्राप्त किया लेकिन उनका मन जीवन में कुछ अलग राह को ही खोज रहा था डॉ आरती बताती है शुरू से ही उन्हें जंगल चिड़ियों की आवाज शांत स्वछंद वातावरण ,जनजाति गांव के लोग ,सदा अपनी और आकर्षित करते रहे है..

ऐसा ही कुछ डॉ आरती के जीवन में एक क्षण आया और उनकी सोच को उड़ान मिल गई ये बात है लगभग आज से 18/19 साल पहले की है अचानक भाग्य ने मौका दिया फिर जो सफ़र शुरू हुआ जिसमे तमाम मुश्किलों के साथ कोई अनुभव भी नहीं था पर डॉ आरती ने हिम्मत नहीं हारी नहीं मानी अपने उद्देश्य और सोच को ले कर निकल पड़ी ये सफर जब उन्होंने शुरू किया तब वो प्रदेश की अकेली महिला थी।

डॉ आरती बताती है वो अपनी कार ले कर सुबह 5 बजे निकल जाती थी और अपने कार्य में लग जाती थी उस समय लोगों को जागरूक करना गांव में सघन वन क्षेत्र में आदिवासी जन समुदाय के बीच कार्य करना उनको जीवन के हर पहलुओं पर प्रशिक्षण देना मदद करना और सामाजिक आर्थिक उत्थान के लिए सतत प्रयास रात रहना उनके बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार इत्यादि कई पहलुओं पर डॉ आरती आज भी कार्य कर रही है डॉ आरती की उपलब्धियों में अब तक उन्होंने जैव विविधता पर आधारित अपने प्राकृतिक कृषि और बागवानी के क्षेत्र में 3000 कार्यशालाओं को सफलतापूर्वक संपन्न किया है

डॉ आरती का सबसे महत्वपूर्ण विषय या विशेषज्ञता रहती हैं ग्रह मंडल सौर मंडल के अनुसार बागवानी का प्रशिक्षण उनकी इसी विशेषज्ञता के लिए अमेरिका से कृषि वैज्ञानिक भी उनका साक्षात्कार ले कर उनके बनाए गये मॉडल की पद्धति को ले चुके हैं।

उनके इसी अद्भुत मॉडल को भारत के भी कई विश्वविद्यालयों ने अपने लिए चुना है उस मॉडल की खासियत है कि सिर्फ 900 एस्क्वायर की जगह पर डॉ आरती ने ग्रह मंडल सूर्य किरण और खगोलशास्त्र वास्तु के आधार पर 74 तरह की साग सब्जी फल फूल मसाले और औषधीय पौधों का एक साथ सफलतापूर्ण उत्पादन किया।

डॉ आरती ने अपनी विज्ञान की पढ़ाई और परिवार से मिले संस्कारों को इस तरह पिरोया की उन्होंने अपनी मेहनत लगन से पुरातन जैव विविधता से कृषि के सिद्धांत को जिसमे वैदिक पद्धति से लेकर वैज्ञानिक तथ्यों को संजो दिया।

डॉक्टर आरती की उपलब्धि

कॉलेज और विश्व विद्यालयों में युवाओं को बागवानी से जुड़े स्टार्टअप प्रोग्राम को दे कर युवाओं की जीवन में सकारात्मक आर्थिक उत्थान के साथ बदलाव किया है
भारत के लगभग सभी शहरी में किचेन गार्डेनिंग , टेरेस गार्डेनिंग और जैव विविधता से जुड़े बहुत सारे विषयों पर कार्यशाला का सफल आयोजन ऑफ लाइन ऑन लाइन करती रहती हैं
स्कूल में विशेष ध्यान रखते हुए डॉ आरती बताती है उनको बहुत पसंदीदा होता हैं गांव या शहर के स्कूल के बच्चों के बीच पर्यावरण संरक्षण,जैव विविधता पर बागवानी प्रशिक्षण देना और बच्चों को अपनी संस्कृति परंपरा से जोड़ना
अनगिनत महिला समूहों को उनकी रुचिनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण ,उत्पाद और उसका विपणन तकि महिलाएं स्वरोजगार से जुड़े और आर्थिक स्तर पर मजबूती से रहे

डॉ आरती बताती है उनके सबसे पसंदीदा विषयों में एक है औषधीय , सुगंधित पौधों की खेती ,उत्पाद और गांव से के कर शहर के लोगों को उनकी जानकारी देना इन सबके लिए डॉ आरती स्वयं बताती है कि उन्होंने स्वयं कई समय जंगलों में वन क्षेत्र के लोगों के बीच रहीं वनस्पति जड़ी बूटी,औषधीय, सुगंधित पौधों का अध्ययन किया और आज वो सफलता पूर्वक भारतीय संस्कृति परंपरा में औषधियों सुगंध के महत्व पर कार्य शालाएं भी लेती है
डॉ आरती अरोमा थैरेपी विशेषज्ञ भी है और सुगंध विज्ञान की विशेषज्ञ है भी उनका एक बहुत बड़ा कार्यक्षेत्र है फूलों की खेती और उसके के द्वार विकित्सा।

महिला समूह द्वार डॉ आरती और उनकी टीम ने अभी तक ढाई लाख औषधीय पौधों का सफलतापूर्ण छत्तीसगढ़ और बाहरी राज्यों में भी रोपण किया है ग्रामीण महिलाओं के अतिरिक्त आय के स्त्रोत हेतु किया जाता है
डॉ आरती बहुत बड़ा प्राकृतिक कृषि करने वाले किसान समूह का संचालन करती है और उनके विक्रय प्रबंधन पर भी मदद करती है,उनके साथ उनकी टीम के सदस्य भी साथ होते हैं देसी बीज बैंक को तैयार करवा कर बहुत बड़ी मिसाल बनाई है ,उनकी उपलब्धि रहीं कि ग्रुप के सदस्य रोहित साहू द्वारा तैयार देसी धान के बीजों का डॉ आरती द्वारा कोसी कलन में किए गए प्रोजेक्ट में उपयोग किया गया और छत्तीसगढ़ के उन्हीं बीजों का चयन जी 20 में हुआ ,देसी बीज संरक्षण की श्रृंखला में राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।

 

अनेकों देसी गौ शालाओं में प्रशिक्षण संरक्षण,उत्पाद विक्रय आदि विषयों पर बांस की व्यावसायिक कृषि उपयोगिता आदि पर अपनी महारत रखती है.. भूटान सिक्किम आसाम गुवाहाटी आदि जगहों पर वहां के क्षेत्रीय जनजाति समूह के लिए पारंपरिक इको पर्यटन के साथ साथ संस्कृति पर सराहनीय कार्य कर रही है इसमें डॉ आरती भारत वर्ष के लगभग सभी राज्यों में कार्यशालाओं के माध्यम से अपनी योग्यता और मेहनत अपनी पहचान बना चुकी है
प्रधानमंत्री कौशल विकास के तहत भी कई राज्यों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने अपने अनुभव द्वारा कार्य किया
डॉ आरती बहुत सारी संस्थाओं से जुड़ कर जनमानस की प्रगति सेवा और उत्थान हेतु सतत प्रयासरत रहती है
बस्ती के बच्चों को मुफ्त शिक्षा, जागरूकता अभियान ,नशा मुक्ति,स्वास्थ्य शिविर आवश्यक सामग्री इत्यादि कई सामाजिक पहलुओं पर डॉ आरती निःस्वार्थ अपनी सेवाएं देती है
आज डॉ आरती को किसी पहचान की जरूरत नहीं आज उनके द्वार किए गए उल्लेखनीय कार्य समाज को दिए गए योगदान अतुलनीय है डॉ आरती कई राष्ट्रीय संस्थाओं का नेतृत्व भी किया है।
aartisathe2013@gmail.com
9981881201

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