
पराली से तैयार करें गाय-भैंसों के लिए पौष्टिक चारा, बढ़ेगी दूध की मात्रा
जलवायु परिवर्तन, लगातार घटते चारागाह और पशुचारे की बढ़ती कमी के बीच किसानों के सामने पशुपालन को लाभकारी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी समस्या के समाधान की दिशा में शहीद गुंडाधुर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर ने एक सराहनीय और व्यावहारिक पहल की है। इस पहल के तहत किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में बचने वाली पराली को जलाने के बजाय उसे उपयोगी और पौष्टिक पशु आहार में बदलने की विधि सिखाई जा रही है।
महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि वे पराली जलाने जैसी हानिकारक प्रथा को छोड़कर ‘यूरिया उपचार’ तकनीक को अपनाएं। इससे न केवल पर्यावरण को बचाया जा सकता है, बल्कि पशुपालन की लागत घटाकर किसानों की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है।
पराली जलाने से नुकसान, चारे की भारी कमी
वैज्ञानिकों के अनुसार फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं और मानव व पशु स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में हरे और सूखे चारे की भारी किल्लत बनी हुई है। ऐसे में पराली का सही उपयोग किसानों के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. आर.एस. नेताम के मार्गदर्शन में ‘लर्निंग बाय डूइंग’ यानी करके सीखने की अवधारणा पर आधारित एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में कृषि छात्रों और क्षेत्र के किसानों को पराली के यूरिया उपचार की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
जीवंत प्रदर्शन से सिखाई गई तकनीक
कार्यशाला के दौरान सहायक प्राध्यापक डॉ. नीता मिश्रा ने किसानों को पराली यूरिया उपचार की विधि का जीवंत प्रदर्शन करके दिखाया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक बेहद सरल, सस्ती और हर किसान की पहुंच में है। थोड़ी सी सावधानी और सही प्रक्रिया अपनाकर किसान अपने पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाला चारा तैयार कर सकते हैं।
किसान कैसे बना सकते हैं पराली से पशुओं के लिए पोष्ष्टिक चारा (स्टेप-बाय-स्टेप विधि)
वैज्ञानिकों ने पराली को पौष्टिक चारा बनाने की पूरी प्रक्रिया को आसान चरणों में समझाया, इसमें पराली को यूरिया से उपचारित करके चारा तैयार किया जाता है, जिसकी स्टेप-बाय-स्टेप विधि या तरीका इस प्रकार से है:
- सबसे पहले एक क्विंटल पैरा (पराली) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर कुट्टी बना लें।
- इसके बाद 4 प्रतिशत यूरिया का घोल तैयार करें, यानी 100 किलो पराली के लिए लगभग 4 किलो यूरिया पानी में घोलें।
- अब इस घोल का पराली की परतों पर समान रूप से छिड़काव करें।
- छिड़काव के बाद पराली को अच्छी तरह मिलाकर किसी वायुरहित स्थान पर रखें या तिरपाल से ढंककर दबा दें।
- इस मिश्रण को करीब 21 दिनों तक ऐसे ही बंद अवस्था में रहने दें।
- निर्धारित समय के बाद पराली को बाहर निकालें, थोड़ी देर हवा में सुखाएं और फिर पशुओं को खिलाएं।
पशुओं के लिए ‘सुपर फूड’ बनेगा यूरिया उपचारित चारा
वैज्ञानिकों ने बताया कि सामान्य पराली में सिलिका और ऑक्सालेट जैसे तत्व मौजूद होते हैं, जो पशुओं के पाचन और कैल्शियम के अवशोषण में बाधा डालते हैं। लेकिन यूरिया उपचार के बाद पराली के पोषण मूल्य में काफी सुधार हो जाता है। यूरिया उपचार से पराली में प्रोटीन की मात्रा 4 प्रतिशत से बढ़कर 6 से 8 प्रतिशत तक हो जाती है। चारा मुलायम और सुपाच्य बन जाता है, जिससे पशु इसे रुचि से खाते हैं। इसके नियमित उपयोग से पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है और दुग्ध उत्पादन में भी अच्छी खासी बढ़ोतरी देखने को मिलती है।



