
फरवरी में गेहूं की फसल में करें ये 5 जरूरी काम, नहीं तो बढ़ सकता है नुकसान
फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए सबसे नाजुक और संवेदनशील माना जाता है। इस समय अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल में या तो बालियां निकल रही होती हैं या फिर दाना भरने की प्रक्रिया (दूधिया अवस्था) शुरू हो जाती है। ऐसे में थोड़ी-सी भी लापरवाही किसानों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी में तापमान में अचानक बढ़ोतरी और तेज हवाएं गेहूं की फसल के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। कई बार तेज हवा चलने और खेत में ज्यादा नमी होने की वजह से पौधे जड़ से गिर जाते हैं, जिससे गेहूं की पैदावार में 20 से 30 फीसदी तक की कमी आ सकती है। इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय रहते फसल की सही देखभाल करें और नुकसान से बचाव के उपाय अपनाएं।
आज हम किसानों के लाभार्थ फरवरी में गेहूं की फसल के लिए 5 आसान काम बता रहे हैं, जिन्हें अपना कर किसान नुकसान से बच सकते हैं, तो आइए जानते हैं, इसके बारे में।
फरवरी में गेहूं को क्यों होता है ज्यादा नुकसान
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी में यदि मौसम सामान्य से अधिक गर्म रहता है और बारिश कम होती है, तो गेहूं की फसल समय से पहले पकने लगती है। इससे बाली में दाने ठीक से नहीं बनते और दाने हल्के रह जाते हैं, जिससे कुल उत्पादन घटने की आशंका बढ़ जाती है। इससे किसान को बाजार में गेहूं बेचने पर बेहतर भाव नहीं मिल पाते हैं और परिणामस्वरूप उसे आर्थिक हानि उठानी पड़ती है। ऐसे में समय-समय पर गेहूं की फसल में जरूरी काम किए जाने चाहिए ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके।
नुकसान से बचने के लिए क्या करें किसान
फरवरी माह में अधिक तापमान से गेहूं की फसल को नुकसान से बचाने के लिए किसान कुछ जरूरी काम करके अपनी फसल को सुरक्षित कर सकते हैं, ये 5 जरूरी काम इस प्रकार से हैं:
1. सही समय पर करें सिंचाई
फरवरी महीने में जैसे ही तापमान बढ़ता है, हवाओं की रफ्तार भी तेज हो जाती है। अगर इस समय किसान भारी सिंचाई कर देते हैं और उसी दौरान तेज हवा चल जाए, तो गीली मिट्टी के कारण पौधे गिरने लगते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि भारी सिंचाई से बचें, इस समय स्प्रिंकलर (फव्वारा तकनीक) से हल्की सिंचाई सबसे सुरक्षित मानी जाती है। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सिंचाई शाम के समय या हवा शांत होने पर ही करें ताकि खेत में लंबे समय तक नमी बनी रहे।
2. फसल की ऊंचाई पर रखें नियंत्रण
कुछ गेहूं की किस्में स्वभाव से अधिक लंबी होती हैं, जिससे गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह से प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) का उपयोग कर सकते हैं। यह पौधे की अनावश्यक लंबाई को रोकता है और ऊर्जा को बालियों की ओर मोड़ता है जिससे तने का निचला हिस्सा मजबूत बनाता है।
3. बोरॉन का करें छिड़काव
दाना बनने की अवस्था में गेहूं की फसल को बोरॉन की आवश्यकता होती है। इसकी कमी से बालियां सूख सकती हैं या दाने छोटे और कमजोर रह सकते हैं। ऐसे में बोरॉन का छिड़काव परागण (Pollination) में सहायता करता है। इसका छिड़काव पौधों की कोशिकाओं को लचीला बनाता है और गेहूं के दाने चमकीले, भरपूर और मजबूत बनते हैं।
4. पोटाश और फास्फोरस का सही उपयोग करें
फरवरी में गेहूं की फसल जिस अवस्था में होती है, उस समय नाइट्रोजन का अधिक इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा नाइट्रोजन देने से पौधा लंबा तो हो जाता है, लेकिन कमजोर होकर गिरने लगता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि पोटाश और फास्फोरस का संतुलित उपयोग करें। पोटाश तने को मजबूती देता है और इससे दाने वजनदार बनते हैं और पौधा तेज हवा का सामना कर पाता है।
5. मौसम पर लगातार रखें नजर
आज के समय में मौसम की जानकारी किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में किसानों को चाहिए कि सरकारी मौसम ऐप्स और अलर्ट पर नजर रखें। यदि अगले 2–3 दिनों में तेज हवा या बारिश की चेतावनी हो, तो सिंचाई तुरंत रोक दें और मौसम के अनुसार ही खेत में काम करें।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी में की गई सही देखभाल ही मार्च-अप्रैल की गेहूं की पैदावार तय करती है। इसलिए नियमित निगरानी, संतुलित खाद, सही सिंचाई और मौसम की जानकारी के साथ किसान अपनी गेहूं की फसल को गिरने से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।



