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भारत ने दुनिया को ज्ञान – विज्ञान दिया, आधुनिकता और अध्यात्म भी – संजय तिवारी

विप्र नगर बस्ती में सम्पन्न हुआ हिन्दू सम्मेलन

रायपुर। विप्र नगर बस्ती रायपुर में हिन्दू सम्मेलन का कार्यक्रम उत्साह पूर्वक सम्पन्न हुआ। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रायपुरा नगर के संघचालक जयनेन्द्र जैन, मुख्य वक्ता संजय तिवारी, मुख्य अतिथि किन्नर अखाड़ा महामंडलेश्वर सुश्री सौम्या दीदी एवं हिन्दू समाज के सम्मानीय नागरिक गण उपस्थित थे।

इस सम्मेलन में सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इस सम्मेलन में उपस्थित थे।
इसके अलावा संत वेदप्रकाश महाराज विशेष तौर पर शामिल हुए

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय तिवारी नें हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारत नें दुनिया को ज्ञान दिया विज्ञान दिया। आधुनिकता और अध्यात्म भी प्रदान किया। जिसने दुनिया को शक्ति भी सिखाया और भक्ति की दिशा भी दी। उन्होनें कहा पाँच बातें व्यवहार में लानी होगी। पहला भेद को खत्म करना होगा।

समाज के हर वर्ग में हमारा उठना, बैठना, सुख दुःख में सहभागिता हो. सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है. पानी का साधन जो भी हो वह सबके लिए हो.

दूसरा, अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें. आपस के सुख दुःख की चर्चा करें. हम कौन हैँ, देश की स्थिति परिस्थिति पर चर्चा करें. महान आदर्शो पर चर्चा करना, उन्हें जीवन में कैसे अपनाएं इस पर चर्चा कर, प्रेरित करना.
तीसरा, आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूँ. सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कैसे कम हो सकता है, पेड़ लगाओ, वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैँ.

चौथा, स्व के मार्ग पर चलना. घर, परिवार, समाज में स्व भाषा बोलूंगा. यदि दूसरे प्रान्त में रहता हूँ तो वहाँ की भाषा भी सीख लूंगा. अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूँ. अपनी वेशभूषा पहनना ही नहीं आता यह ठीक नहीं. स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करेंगे.

पांचवा, धर्म सम्मत आचरण कैसे करें, इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए. संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्य व संस्कृति के दर्शन की अभिव्यक्ति होती है. उन्हें पालन करना चाहिए. कुछ बातें क़ानून में नहीं हैँ, माता-पिता बड़ों के चरण स्पर्श करना, इससे विनम्रता आती है. बच्चोँ को संस्कार दें, घर में बच्चोँ से दान दिलवाने की परंपरा रही है, जिससे उनमें दायित्व का बोध आए.

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