
डीएपी खाद पर 36% ज्यादा सब्सिडी, 31 मार्च 2026 तक किसानों को मिलेगा लाभ
रबी की फसलों की बेहतर पैदावार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy–NBS) योजना की नई दरों को मंजूरी दे दी है। यह नीति 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को सुरक्षित रखना और उन्हें उर्वरक उचित व किफायती दामों पर उपलब्ध कराना है। नई नीति के तहत डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरकों पर सब्सिडी में बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की लागत कम होगी और रबी सीजन में उत्पादन को मजबूती मिलेगी।
रबी 2025–26 के लिए कितना बढ़ा सब्सिडी बजट
सरकार ने रबी 2025–26 सीजन के लिए उर्वरक सब्सिडी की अनुमानित बजटीय आवश्यकता 37,952.29 करोड़ रुपए तय की है। यह राशि पिछले खरीफ सीजन की तुलना में करीब 736 करोड़ रुपए अधिक है। वहीं, पिछले तीन वर्षों यानी 2022–23 से 2024–25 के दौरान केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर कुल मिलाकर 2.04 लाख करोड़ रुपए से अधिक का आवंटन किया है। यह बढ़ा हुआ बजट साफ तौर पर दिखाता है कि सरकार कृषि क्षेत्र और किसानों की आय बढ़ाने को लेकर गंभीर है।
डीएपी की सब्सिडी में बड़ा इजाफा
एनबीएस (NBS) योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सब्सिडी उर्वरक की बोरी के बजाय उसमें मौजूद पोषक तत्वों के वास्तविक वजन के आधार पर तय की जाती है। इसमें नाइट्रोजन (N), फॉस्फेट (P), पोटाश (K) और सल्फर (S) जैसे तत्वों के लिए प्रति किलोग्राम सब्सिडी निर्धारित की जाती है। रबी 2025–26 के लिए नाइट्रोजन पर 43.02 रुपए प्रति किलोग्राम और फॉस्फेट पर ₹47.96 प्रति किलोग्राम की सब्सिडी तय की गई है। इसी वजह से इस बार डीएपी खाद पर सब्सिडी बढ़कर 29,805 रुपए प्रति मीट्रिक टन हो गई है, जो रबी 2024–25 में 21,911 रुपए प्रति मीट्रिक टन थी। यानी डीएपी पर करीब 36 प्रतिशत अधिक सब्सिडी दी जा रही है।
रबी सीजन के लिए उर्वरकों पर नई सब्सिडी दरें
देश की जलवायु विविधता और विभिन्न फसलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुल 28 प्रकार के उर्वरक ग्रेड को NBS योजना में शामिल किया है। प्रमुख उर्वरकों पर मिलने वाली सब्सिडी इस प्रकार है:
| उर्वरक (ग्रेड) | सब्सिडी (₹ प्रति मीट्रिक टन) |
| डीएपी (18-46-0-0) | 29,805 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
| एमओपी (0-0-60-0) | 1,428 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
| एनपीके (19-19-19) | 17,738 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
| एनपीके (12-32-16) | 20,890 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
| एसएसपी (0-16-0-11) | 7,408 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
| यूरिया-एसएसपी कॉम्प्लेक्स | 9,088 रुपए प्रति मीट्रिक टन |
इन दरों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उर्वरक बाजार में स्थिर कीमतों पर उपलब्ध रहें।
सूक्ष्म पोषक तत्वों और फोर्टिफिकेशन को बढ़ावा
सरकार ने इस बार केवल प्रमुख पोषक तत्वों पर ही नहीं, बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्वों पर भी विशेष ध्यान दिया है। यदि कोई उर्वरक बोरॉन या जिंक से लेपित है, तो कंपनियों को अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी, जिसमें बोरॉन लेपित खाद पर 300 रुपए प्रति मीट्रिक टन और जिंक लेपित खाद पर 500 रुपए प्रति मीट्रिक टन किसानों को मिलेगी। इसके उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और दीर्घकाल में फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी।
घरेलू उर्वरक उत्पादन में 50% से अधिक वृद्धि
एनबीएस (NBS) योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू देश को उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जहां घरेलू उर्वरक उत्पादन 112.19 लाख मीट्रिक टन था, वहीं 2025 के अंत तक इसके 168.55 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है। यह लगभग 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है।
सख्त निगरानी व्यवस्था भी लागू
सरकार ने सब्सिडी के साथ-साथ सख्त निगरानी व्यवस्था भी लागू की है। उर्वरक कंपनियों को अपनी लागत और अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) की जानकारी अनिवार्य रूप से सरकार को देनी होगी। उर्वरक विभाग नियमित जांच करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब्सिडी का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचे। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर एनबीएस (NBS) योजना की नई दरें रबी सीजन में किसानों को बड़ी राहत देने वाली हैं और फसलों की बेहतर पैदावार में अहम भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इन नई दरों से रबी फसलों की लागत घटेगी और किसानों की आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।



