
गेहूं के कल्ले बढ़ाने के लिए अपनाएं ये उपाय
गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी पैदावार का सीधा संबंध फसल में निकलने वाले कल्लों (टिलर्स) की संख्या से होता है। जितने अधिक मजबूत और स्वस्थ कल्ले होंगे, उतनी ही ज्यादा बालियां बनेंगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। यही कारण है कि किसान रबी सीजन में गेहूं के कल्ले बढ़ाने के उपायों पर खास ध्यान देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय पर सही पोषण और उचित देखभाल की जाए तो गेहूं की फसल से बंपर पैदावार प्राप्त की जा सकती है।
गेहूं के कल्ले बढ़ाने में सरसों की खली की अहम भूमिका (गेहूं टिलर बढ़ाने की तकनीक)
गेहूं की फसल में कल्ले बढ़ाने के लिए सरसों की खली एक सस्ता, टिकाऊ और बेहद प्रभावी जैविक विकल्प बनकर सामने आई है। यह न सिर्फ पौधों को जरूरी पोषण देती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रखती है। खेती विशेषज्ञों का कहना है कि सरसों की खली का सही समय और सही मात्रा में उपयोग करने से गेहूं की पैदावार और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखा गया है। सरसों की खली में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद सल्फर गेहूं के दानों में चमक लाने के साथ-साथ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में भी सहायक होता है। चूंकि यह खाद धीरे-धीरे मिट्टी में घुलती है, इसलिए फसल को लंबे समय तक निरंतर पोषण मिलता रहता है, जिससे कल्लों का विकास बेहतर होता है।
मिट्टी की सेहत सुधरने से बढ़ते हैं कल्ले
सरसों की खली का एक बड़ा फायदा यह है कि यह मिट्टी को भुरभुरा बनाती है। भुरभुरी मिट्टी में गेहूं की जड़ें गहराई तक फैलती हैं, जिससे पौधे मजबूत बनते हैं और गिरने की संभावना कम हो जाती है। मजबूत जड़ों के कारण पौधे ज्यादा पोषक तत्व और पानी अवशोषित कर पाते हैं, जिसका सीधा असर कल्लों की संख्या और उनकी मजबूती पर पड़ता है। सर्दियों के मौसम में सरसों की खली की तासीर गर्म मानी जाती है। दिसंबर-जनवरी में पड़ने वाले पाले के समय यह फसल को कुछ हद तक सुरक्षा देती है। इससे गेहूं की बालियां बेहतर तरीके से विकसित होती हैं और दानों का वजन भी बढ़ता है, जो उत्पादन बढ़ाने में सहायक होता है।
सरसों की खली का सही उपयोग कैसे करें
किसान बुवाई के समय खेत की तैयारी के दौरान 20 से 30 किलो सरसों की खली प्रति एकड़ की दर से मिट्टी में मिला सकते हैं। यदि बुवाई के समय इसका उपयोग नहीं किया गया हो, तो पहली या दूसरी सिंचाई से पहले इसे बारीक पाउडर बनाकर मिट्टी या थोड़ी मात्रा में यूरिया के साथ खेत में डाल सकते हैं। सही विधि से प्रयोग करने पर इसका प्रभाव जल्दी और बेहतर देखने को मिलता है।
गेहूं के कल्ले बढ़ाने के अन्य कारगर उपाय (गेहूं की पैदावार बढ़ाने के उपाय)
केवल सरसों की खली ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य पोषक तत्व और जैविक उपाय भी गेहूं में कल्ले बढ़ाने में सहायता करते हैं। किसान ह्यूमिक एसिड का उपयोग कर सकते हैं, जो मिट्टी की संरचना में सुधार करता है और जड़ों के विकास को बढ़ावा देता है। इसे 1 से 2 किलो प्रति एकड़ की दर से प्रयोग किया जाता है। इसी तरह माइकोराइजा का उपयोग भी लाभकारी है। यह जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाकर पानी और पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाता है। इसे 4 से 6 किलो प्रति एकड़ की मात्रा में खेत में मिलाया जाता है, जिससे पौधे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं और कल्लों की संख्या बढ़ती है। इसके अलावा गेहूं की फसल को संतुलित पोषण देने के लिए एनपीके 19:19:19 का छिड़काव भी किया जा सकता है। इसे प्रति लीटर पानी में 4–5 ग्राम मिलाकर फसल पर छिड़काव किया जाता है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए मिक्स माइक्रो न्यूट्रिएंट का उपयोग 100 ग्राम प्रति एकड़ की दर से किया जा सकता है, जिससे पौधों की समग्र वृद्धि और उपज में सुधार होता है। इसके अलावा कल्ले बनने की अवस्था (20–35 दिन) में समय पर सिंचाई करना जरूरी है।
गेहूं में रोग और कीट पर नियंत्रण भी है जरूरी
जहां एक ओर सही पोषण से गेहूं के कल्ले बढ़ते हैं, वहीं दूसरी ओर मिट्टी में मौजूद कीट और रोग भी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरसों की खली की तीखी गंध के कारण मिट्टी में दीमक, निमाटोड और कुछ फंगल रोगों का प्रकोप कम होता है। इससे फसल स्वस्थ रहती है और कल्लों का विकास बिना रुकावट के होता है। कुल मिलाकर यदि किसान समय पर सरसों की खली और अन्य पोषक तत्वों का सही मात्रा में उपयोग करें, तो गेहूं की फसल में कल्ले बढ़ाकर अधिक और गुणवत्तापूर्ण पैदावार हासिल की जा सकती है।
गेहूं के कल्ले बढ़ाने के उपाय एक नजर में
- गेहूं में अधिक कल्ले पाने के लिए समय पर पोषण और सही देखभाल बेहद जरूरी है।
- खेत की तैयारी के समय 20–30 किलो सरसों की खली प्रति एकड़ मिट्टी में मिलाएं।
- यदि बुवाई पर खली न दी हो तो पहली या दूसरी सिंचाई से पहले खली का पाउडर डालें।
- सरसों की खली से मिट्टी भुरभुरी होती है, जिससे जड़ें मजबूत बनती हैं और कल्ले बढ़ते हैं।
- सर्दियों में खली फसल को पाले से आंशिक सुरक्षा देती है।
- ह्यूमिक एसिड 1–2 किलो प्रति एकड़ देने से जड़ों का विकास बेहतर होता है।
- माइकोराइजा 4–6 किलो प्रति एकड़ उपयोग करने से पोषक तत्वों का अवशोषण बढ़ता है।
- संतुलित पोषण के लिए NPK 19:19:19 (4–5 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए मिक्स माइक्रो न्यूट्रिएंट 100 ग्राम प्रति एकड़ दें।
- सरसों की खली से दीमक, निमाटोड और कुछ रोगों का प्रकोप भी कम होता है।
- स्वस्थ फसल में मजबूत कल्ले बनते हैं और पैदावार में बढ़ोतरी होती है।
- कल्ले बनने की अवस्था (20–35 दिन) में समय पर सिंचाई करना जरूरी है।



