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महाराष्ट्र में भारी बारिश से प्याज और अन्य फसलें बर्बाद, किसानों को भारी नुकसान

महाराष्ट्र में लगातार हो रही भारी बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है। प्याज सहित कई प्रमुख फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।

राज्य के कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त–सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश से 30 जिलों में लगभग 17.85 लाख हेक्टेयर (करीब 42.84 लाख एकड़) क्षेत्र की फसलें प्रभावित हुई हैं। नांदेड, यवतमाल, वाशीम, अकोला, बुलढाणा, सोलापुर और औरंगाबाद सहित कई जिले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। सोयाबीन, मक्का, कपास, दालें, गन्ना और हल्दी जैसी फसलों के साथ-साथ सब्ज़ियों और फलों को भी व्यापक नुकसान पहुँचा है।

सबसे गंभीर स्थिति प्याज उत्पादक क्षेत्रों की है। नासिक, अहमदनगर, जलगाँव, धुले, पुणे और सोलापुर में खड़ी प्याज की फसलें जलभराव से नष्ट हो गईं। जिन किसानों ने फसल काटकर भंडारण किया था, उनकी उपज भी लगातार नमी के कारण सड़ गई है। नासिक और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर प्याज की उपज खराब हो जाने से किसान गहरे संकट में हैं।

महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संघ के नेता भारत दिघोले ने कहा कि कई वर्षों से किसानों को प्याज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। इस साल किसानों ने बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च कर फसल तैयार की, लेकिन जब उपज बेचने का समय आया तो बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। अब या तो खेत में फसल नष्ट हो गई है या गोदामों में प्याज सड़ रही है।

आमतौर पर किसान गर्मियों की प्याज को स्टोर कर लेते हैं ताकि मानसून सीजन में बेहतर दाम मिल सके। लेकिन इस बार बरसात के दौरान प्याज की कीमतें नहीं बढ़ीं। ऊपर से सितंबर में भारी बारिश ने प्याज की उपज को और नुकसान पहुंचा दिया। पहले किसानों को स्टोरेज पर खर्च करना पड़ा और अब उपज बर्बाद होने से उन पर दोहरी मार पड़ी है।

राज्य सरकार ने नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। कृषि मंत्री ने प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवज़ा देने का आश्वासन दिया है। वहीं, महाराष्ट्र प्याज उत्पादक संघ ने प्रति एकड़ एक लाख रुपये तक की राहत राशि देने की माँग की है।

महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। सितंबर में हुई भारी बारिश का असर अब थोक और खुदरा बाज़ारों में प्याज और अन्य सब्ज़ियों की कीमतों पर भी दिख सकता है।

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