
जुलाई में गन्ने की देखभाल: तेजी से बढ़ती फसल और प्रबंधन
इस बार जुलाई माह तेज बारिश के साथ आया है, जिससे गन्ने की फसल में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इस समय तक गन्ने में कल्ले (नई शाखाएं) निकल चुके हैं और पौधे तीव्र गति से बढ़ रहे हैं। जुलाई से सितंबर के बीच गन्ना औसतन हर हफ्ते 4.9 इंच तक बढ़ता है।
इस वृद्धि को ध्यान में रखते हुए मिट्टी चढ़ाने का कार्य समय पर करना बहुत जरूरी है, जब मिट्टी नरम हो और पौधे कमजोर हों। इससे पौधों को सहारा मिलता है और वे गिरने की बजाय मजबूत बनते हैं।
जुलाई में मिट्टी चढ़ाएं और अगस्त में बंधाई का कार्य करें।
गन्ने में पोक्का बोइंग रोग – पहचान और उपचार
पोक्का बोइंग एक फफूंदजनित रोग है जो गन्ने को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसकी पहचान पत्तियों पर सफेद-पीले धब्बों से होती है, जो बाद में काले पड़कर सूख जाती हैं। इससे गन्ने का ऊपरी हिस्सा सड़ने लगता है और पौधा बौना रह जाता है।
उपचार:
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कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.2% या
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बावस्टीन 0.1% घोल का छिड़काव करें।
गन्ने में लाल सड़न रोग – लक्षण और नियंत्रण
इस रोग में पत्तियां पहले पीली और फिर सूखी हो जाती हैं। खासकर, गन्ने के ऊपरी हिस्से की तीसरी-चौथी पत्तियों का सूखना आरंभिक लक्षण है।
उपचार:
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प्रभावित पौधों को खेत से तुरंत हटा दें।
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थियोफिनेट मेथिल, काबेन्डाजिम या टिबूकोनाजोल का 0.1% घोल बनाकर 2–3 बार छिड़काव करें।
गन्ने की फसल में कीट नियंत्रण
1. मिलीबग नियंत्रण:
यह कीट पत्तियों को काला कर देता है और फसल को नुकसान पहुंचाता है।
उपाय:
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संक्रमित पत्तियां हटाकर नष्ट करें।
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एक एकड़ खेत के लिए
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इमिडाक्लोप्रिड – 250 ml
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डायक्लोरोवास (नुवान) – 100 ml
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को 250 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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2. बेधक कीट (बोरर) नियंत्रण:
जुलाई में चोटी बेधक, जड़ बेधक और तना बेधक जैसे कीट सक्रिय हो जाते हैं, जो गन्ने को भीतर से खोखला कर देते हैं।
समाधान:
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ट्राइकोकार्ड का उपयोग करें, जिसमें 10,000 ट्राइकोग्रामा अंडे होते हैं।
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कार्ड को 4 टुकड़ों में काटकर गन्ने की निचली पत्तियों पर बांधें।
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अधिक प्रकोप होने पर हर 15 दिन में दोहराएं



