
Bhopal Master Plan 2047: 254 गांव होंगे शामिल
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नए कमर्शियल हब और आधुनिक ट्रांसपोर्ट पर फोकस
भोपाल। भोपाल के बहुप्रतीक्षित मास्टर प्लान-2047 का प्रारूप अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब दो दशक से लंबित इस योजना का प्रशासनिक मसौदा तैयार कर लिया गया है और मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब इसके सार्वजनिक होने का इंतजार है, जिसके बाद नागरिकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। लंबे समय से नई विकास नीति का इंतजार कर रही राजधानी के लिए इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।राज्य और स्थानीय प्रशासन
‘अमृत काल-2047’ की सोच पर तैयार हुआ नया मास्टर प्लान
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) ने केंद्र सरकार के ‘अमृत काल-2047’ विजन को ध्यान में रखते हुए नया मास्टर प्लान तैयार किया है। वर्ष 1995 के बाद भोपाल का मास्टर प्लान प्रभावी रूप से अपडेट नहीं हो पाया था, जबकि वर्ष 2031 के लिए तैयार मसौदा भी विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से लागू नहीं हो सका। अब नई योजना के जरिए राजधानी के दीर्घकालिक और संतुलित विकास की रूपरेखा तैयार की गई है।
दक्षिण-एशियाई और प्रवासी
कलेक्ट्रेट में आयोजित दिशा (जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति) की बैठक में मास्टर प्लान को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म रहा। बैठक के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और आतिफ अकील तथा फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। हालांकि राजनीतिक विवाद के बावजूद सभी पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भोपाल के विकास के लिए मास्टर प्लान को अब और लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि राजधानी के व्यवस्थित विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधियों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर मास्टर प्लान जल्द जारी करने का अनुरोध किया जाएगा। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार के प्रयासों का समर्थन करने की बात कही है। इससे स्पष्ट है कि शहर के भविष्य को लेकर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विकास के मुद्दे पर सहमति बनती दिखाई दे रही है।
दिग्विजय सिंह ने भी जताया समर्थन
मास्टर प्लान को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज रही। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सांसद आलोक शर्मा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि भोपाल के सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान अत्यंत आवश्यक है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस योजना की प्रक्रिया काफी हद तक पूरी कर ली गई थी।शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण भोपाल का विस्तार बिना समुचित योजना के हुआ। इसके परिणामस्वरूप ट्रैफिक जाम, अवैध कॉलोनियों का विस्तार, बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ता दबाव, पार्किंग संकट और पर्यावरण संरक्षण जैसी समस्याएं लगातार गंभीर होती गईं। नए मास्टर प्लान से इन चुनौतियों का दीर्घकालिक समाधान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में राजधानी के नियोजित विकास के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शामिल किए गए हैं। योजना के अनुसार भोपाल का प्लानिंग एरिया 813 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर 1016.90 वर्ग किलोमीटर किया जाएगा। इसके साथ ही 254 नए गांवों को प्लानिंग क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव है। शहर में चार नए कमर्शियल हब विकसित किए जाएंगे, जबकि मिक्स्ड लैंड यूज, झुग्गी पुनर्विकास, आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क, ग्रीन एरिया और वुडेड जोन के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा पार्किंग आधारित अतिरिक्त एफएआर और कृषि क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य तथा वेयरहाउस जैसी गतिविधियों को अनुमति देने का भी प्रस्ताव शामिल है।
सार्वजनिक सुझावों के बाद होगा अंतिम क्रियान्वयन
प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद नागरिकों, संस्थाओं और विशेषज्ञों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यक संशोधन के बाद योजना को अधिसूचित कर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। राजधानी के आगामी दो दशकों के विकास की दिशा तय करने वाला यह मास्टर प्लान भोपाल के शहरी स्वरूप में व्यापक बदलाव ला सकता है।



